Bastar News Update : दंतेवाड़ा। गीदम वेयरहाउस में 33 हजार क्विंटल चावल सड़ने के मामले के बाद प्रशासन ने अब गुणवत्ता पर पूरी तरह शिकंजा कस दिया है। कलेक्टर टी.के. यदु के निर्देश पर हाल ही में लोकल राइस मिलर्स के 5 लॉट, करीब 1400 क्विंटल चावल को गुणवत्ता जांच में रिजेक्ट कर दिया गया। जांच में चावल में 50 प्रतिशत तक टूटे दाने पाए गए, जो एफएक्यू मानकों पर खरे नहीं उतरे। इस कार्रवाई से जिले के राइस मिलर्स में हड़कंप मच गया है। मिलर्स का तर्क है कि उन्हें संग्रहण केंद्रों से जैसा धान मिला, उसी की मिलिंग कर चावल दिया गया।


हालांकि, प्रशासन ने साफ कर दिया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं होगा। वेयरहाउस में अभी भी 113 लॉट खराब चावल पड़ा हुआ है। नियमों के अनुसार पहले साफ चावल जमा करना होगा, तब ही खराब चावल उठाया जा सकेगा। अब तक एक भी मिलर ने बदला हुआ चावल जमा नहीं किया है। समयसीमा पूरी न होने पर एफआईआर की कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। इस सख्ती का असर पीडीएस आपूर्ति पर भी दिखने लगा है। जिले में जरूरत के मुकाबले चावल का भंडार बेहद कम रह गया है। प्रशासन अब राज्य और केंद्र की संयुक्त गुणवत्ता जांच की तैयारी में है।
200 करोड़ का अस्पताल, लेकिन दस्तावेज गायब, लाइसेंस पर संकट
बस्तर। जगदलपुर में बने सरकारी सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल का संचालन अब गंभीर सवालों में घिर गया है। हैदराबाद के कॉन्टिनेंटल अस्पताल प्रबंधन को स्वास्थ्य विभाग ने 15 दिन में जरूरी दस्तावेज देने के निर्देश दिए थे। लेकिन तय समयसीमा के बाद भी अस्पताल प्रबंधन कोई ठोस जानकारी प्रस्तुत नहीं कर सका। डॉक्टरों की तैनाती, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर की मानक व्यवस्था संदेह के घेरे में है। बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़े दस्तावेज भी नहीं सौंपे गए। निरीक्षण में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। आपातकालीन सेवाओं के प्रोटोकॉल का भी पूरी तरह पालन नहीं पाया गया। सबसे गंभीर बात यह कि डॉक्टरों की पंजीकरण सूची तक उपलब्ध नहीं कराई गई। छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल के नियमों का उल्लंघन माना जा रहा है। अब स्वास्थ्य विभाग लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया में है। पूरा मामला बस्तर कलेक्टर आकाश छिकारा के संज्ञान में लाया गया है। हरी झंडी मिलते ही औपचारिक कार्रवाई शुरू होगी। मामला सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण सख्ती तय मानी जा रही है।
कुपोषण से लड़ाई: वजन त्यौहार बना स्वास्थ्य की कसौटी
बस्तर। बस्तर जिले में सुपोषित छत्तीसगढ़ अभियान के तहत वजन त्यौहार की शुरुआत हो चुकी है। 9 से 18 फरवरी तक चलने वाले इस अभियान में बच्चों के वजन और ऊंचाई का मापन किया जा रहा है। शून्य से पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को अभियान में शामिल किया गया है। इसके साथ गर्भवती महिलाओं, शिशुवती माताओं और किशोरियों की भी जांच हो रही है। एनीमिया और बीएमआई की जांच पर विशेष फोकस किया गया है। जिले के करीब 2000 आंगनबाड़ी केंद्रों में यह अभियान चलाया जा रहा है। 85 हजार से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब भी करीब 19 हजार बच्चे कुपोषित हैं।।अभियान का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं है। पालकों को बच्चों के पोषण के प्रति जागरूक भी किया जा रहा है। स्थानीय पोषक आहार को बढ़ावा दिया जा रहा है। यह देखा जाएगा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचा या नहीं। अधिकारियों ने सभी पालकों से सहभागिता की अपील की है।
मेकाज ब्लड बैंक में संकट, डोनर की तलाश में भटकते मरीज
बस्तर। डिमरापाल स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ब्लड बैंक में इन दिनों गंभीर संकट है। स्वैच्छिक रक्तदाताओं की कमी से स्टॉक न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। स्थिति यह है कि बी-पॉजिटिव जैसे सामान्य ब्लड ग्रुप भी उपलब्ध नहीं हैं। ब्लड बैंक में केवल 40 से 45 यूनिट रक्त शेष है। जबकि रोजाना 18 से 20 यूनिट की खपत होती है। अस्पताल के शहर से दूर शिफ्ट होने के बाद डोनर्स की संख्या घटी है। परिजनों को मजबूरी में ‘डोनर लाओ, खून पाओ’ व्यवस्था अपनानी पड़ रही है। थैलसीमिया और सिकलीन पीड़ित बच्चों के लिए स्थिति और गंभीर है। अधीक्षक डॉ. अनुरूप साहू ने आम नागरिकों से अपील की है। उन्होंने कहा कि एक यूनिट रक्त तीन जान बचा सकता है। 18 वर्ष से अधिक स्वस्थ व्यक्ति रक्तदान कर सकता है। यदि सिर्फ 3 प्रतिशत लोग भी नियमित रक्तदान करें, संकट खत्म हो सकता है। ब्लड बैंक स्टाफ ने युवाओं से आगे आने की भावुक अपील की है।
मिड-डे मील के बाद बिगड़ी तबीयत, प्रशासन सतर्क
बस्तर। तोकापाल क्षेत्र के अरंडवाल प्राथमिक शाला में बच्चों की तबीयत बिगड़ने का मामला सामने आया। मध्याह्न भोजन के बाद 24 बच्चे अस्वस्थ हो गए। बताया गया कि बच्चों ने पत्ता गोभी की सब्जी खाई थी। भोजन के बाद एल्बेंडाजोल और फाइलेरिया की गोली भी दी गई थी। सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची। मुख्य चिकित्सा अधिकारी और जिला टीकाकरण अधिकारी ने स्थिति का जायजा लिया। 10 बालक और 14 बालिकाएं प्रभावित पाई गईं। एक छात्रा को निगरानी में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती किया गया। बाकी सभी बच्चों की हालत सामान्य बताई गई है। प्राथमिक उपचार मौके पर ही किया गया। प्रशासन पूरे मामले की जांच कर रहा है। भोजन और दवा वितरण प्रक्रिया की समीक्षा की जा रही है। लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई के संकेत दिए गए हैं।
फाइलेरिया उन्मूलन अभियान, घर-घर दवा सेवन पर जोर
बस्तर। बकावंड ब्लॉक में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान प्रभावी रूप से चलाया जा रहा है। यह अभियान 10 से 25 फरवरी तक संचालित होगा। पहले चरण में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में दवा खिलाई जा रही है। स्वास्थ्य पर्यवेक्षकों ने केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। लोगों को फाइलेरिया के खतरे और बचाव की जानकारी दी गई। 13 से 22 फरवरी तक घर-घर जाकर दवा सेवन कराया जाएगा। मितानिन और स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस अभियान में जुटे हैं। 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दवा नहीं दी जाएगी। गर्भवती और गंभीर बीमार लोगों को भी दवा से अलग रखा गया है। 23 से 25 फरवरी तक मॉप-अप राउंड चलेगा।उद्देश्य है कि कोई भी व्यक्ति दवा से वंचित न रहे। स्वास्थ्य विभाग ने इसे बेहद जरूरी अभियान बताया है। लोगों से सहयोग की अपील की गई है।
तेज साइलेंसर पर कार्रवाई, ध्वनि प्रदूषण पर पुलिस सख्त
दंतेवाड़ा। किरंदुल नगर में तेज आवाज वाले बुलेट साइलेंसर पर पुलिस ने सख्त कार्रवाई की है। कस्टमाइज्ड साइलेंसर लगे पांच बुलेट बाइक पकड़ी गईं। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत चालानी कार्रवाई की गई। प्रत्येक वाहन पर 5 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। कुल 25 हजार रुपये का चालान वसूला गया। मौके पर ही साइलेंसर हटवाए गए। पुलिस ने दोबारा ऐसे साइलेंसर न लगाने की हिदायत दी। ध्वनि प्रदूषण से आम नागरिक परेशान थे। यातायात पुलिस ने इसे सुरक्षा से जुड़ा मामला बताया। भविष्य में और सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पुलिस ने युवाओं से नियमों का पालन करने की अपील की है। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने पर जोर दिया गया।
बस कंडक्टर बने फर्स्ट रिस्पॉन्डर, यात्रियों की सुरक्षा पर फोकस
दंतेवाड़ा। दंतेवाड़ा जिला अस्पताल में बस कंडक्टरों को प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण दिया गया। 35 कंडक्टरों ने इस विशेष प्रशिक्षण में भाग लिया। सीपीआर और रक्तस्त्राव नियंत्रण की जानकारी दी गई। फ्रैक्चर और जलने के मामलों में प्राथमिक उपचार सिखाया गया। आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने पर जोर दिया गया। दुर्घटना स्थल की सुरक्षा के बारे में बताया गया। संक्रमण रोकथाम की बुनियादी जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण के साथ स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया। उद्देश्य है कि हादसे में समय रहते जान बचाई जा सके। आरटीओ और स्वास्थ्य विभाग के मार्गदर्शन में आयोजन हुआ। कंडक्टरों को यात्री सुरक्षा की अहम कड़ी बताया गया। इस पहल को सराहा जा रहा है।
रेल विस्तार की रफ्तार, इंटरसिटी की वापसी पर उम्मीद
बस्तर। जगदलपुर रेलवे स्टेशन अमृत भारत योजना के तहत नए रूप में तैयार हो रहा है। स्टेशन को सीनियर सिटीजन और दिव्यांग फ्रेंडली बनाया जाएगा। किरंदुल से कोरापुट तक दोहरीकरण कार्य दिसंबर तक पूरा होगा। 6 साल से बंद दुर्ग-जगदलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के परीक्षण की तैयारी है। नाइट एक्सप्रेस की समय सारिणी पर भी पुनर्विचार किया जा रहा है। प्लेटफार्म नंबर एक पर ट्रेन लाने की योजना है। फूड ओवर ब्रिज और नई सुविधाएं जल्द पूरी होंगी। मार्च तक स्टेशन भवन पूरी तरह चालू होगा। रेलवे भूमि पर अवैध कब्जे हटाने की कार्रवाई होगी। रावघाट रेल लाइन परियोजना पर काम जारी है। डीआरएम ने बस्तर को रेलवे की प्राथमिकता बताया। यात्रियों को बेहतर सुविधा देने का दावा किया गया। रेल विकास से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है।
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक


