Bastar News Update : सुकमा। कोंटा थाना क्षेत्र में पुलिस ने अंतर्राज्यीय तस्करी के खिलाफ सटीक कार्रवाई करते हुए ओडिशा से लाई जा रही गांजा की बड़ी खेप को रास्ते में ही रोक दिया और आरोपी को धर दबोचा गया, जिससे तस्करी नेटवर्क पर बड़ा झटका लगा है। मुखबिर से मिली सूचना पर नेशनल हाईवे-30 सहित कई स्थानों पर नाकाबंदी कर सघन जांच शुरू की गई। नाकाबंदी के दौरान एक युवक स्कूटी से आता दिखा, जिसने पुलिस को देखकर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी में पकड़ा गया। तलाशी में दो बैग से 10 पैकेट गांजा बरामद हुआ, जिसका वजन 21.630 किलोग्राम निकला। जब्त गांजा की कीमत 10 लाख 81 हजार 500 रुपये आंकी गई। आरोपी ने अपना नाम के. शिवा रेड्डी, निवासी हैदराबाद बताया। पुलिस ने स्कूटी सहित गांजा जब्त कर एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया। कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में की गई। पुलिस को उम्मीद है कि इससे बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा।

नक्सलवाद अंतिम दौर में, सरेंडर की लहर ने तोड़ी संगठन की रीढ़

बस्तर। बस्तर में दशकों पुराना नक्सलवाद अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गया है और 31 मार्च 2026 इसकी समाप्ति की दिशा में निर्णायक तारीख बनती दिख रही है। शीर्ष कमांडर पापाराव के आत्मसमर्पण के बाद संगठन की कमर टूट चुकी है। सूत्रों के अनुसार मिशिर बेसरा भी सरेंडर के लिए संपर्क में हैं। पिछले दो वर्षों में 5000 नक्सली नेटवर्क खत्म हुआ, जिसमें 3000 ने आत्मसमर्पण किया, 2000 गिरफ्तार हुए और 500 मारे गए। पुनर्वास नीति और विकास कार्यों ने बड़ा असर डाला है। इस संघर्ष में 1416 जवान शहीद हुए। आईईडी के 1277 मामलों में नुकसान हुआ, लेकिन 4580 आईईडी बरामद कर साजिशें नाकाम की गईं। अब बचे नक्सलियों के पास आत्मसमर्पण या समाप्त होने का ही विकल्प बचा है। बस्तर में अब विकास और शांति की नई तस्वीर उभर रही है।

अफवाहों पर लगाम, जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पर सरकार की सख्त निगरानी

जगदलपुर। वैश्विक हालात के बीच राज्य में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता को लेकर सरकार पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि एलपीजी, पेट्रोल, डीजल और उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। नागरिकों से अफवाहों से दूर रहने और पैनिक बुकिंग न करने की अपील की गई है। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। राज्य और जिला स्तर पर कंट्रोल रूम बनाए गए हैं। उपभोक्ता निर्धारित नंबरों पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जगदलपुर में गैस आपूर्ति सामान्य है। बुकिंग के लिए समय सीमा तय है। बार-बार ऑनलाइन बुकिंग से बचने की सलाह दी गई है। अस्पतालों को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

होमस्टे नीति से पर्यटन को नई रफ्तार, गांवों में खुलेगा रोजगार का रास्ता

बस्तर। बस्तर में होमस्टे नीति 2025-30 के जरिए पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। इस योजना से पर्यटक आदिवासी संस्कृति और जीवनशैली को करीब से अनुभव कर सकेंगे। गोंड और मुरिया समुदायों के साथ रहकर उनकी परंपराओं को समझने का अवसर मिलेगा। प्राकृतिक वातावरण में बने होमस्टे जंगल और झरनों के बीच अनूठा अनुभव देंगे। पारंपरिक भोजन और ग्रामीण जीवन इस अनुभव को खास बनाएंगे। प्रशासन ने नोडल अधिकारी नियुक्त कर क्रियान्वयन तेज किया है। सब्सिडी और निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा और बस्तर को नई पहचान मिलेगी।

उद्योगों की कमी से बढ़ती बेरोजगारी, युवाओं में बढ़ रहा असंतोष

बस्तर। बस्तर में बेरोजगारी बड़ी समस्या बनी हुई है, जहां युवा रोजगार की मांग कर रहे हैं। नगरनार स्टील प्लांट के बाद सहायक उद्योगों की उम्मीद थी, लेकिन जमीन की कमी से काम अटका है। डेढ़ सौ से अधिक प्रस्ताव लंबित हैं। ओडिशा में उद्योगों को जमीन मिल रही है, जिससे निवेश वहां जा रहा है। स्थानीय श्रमिकों को काम नहीं मिल रहा। युवाओं का कहना है कि रोजगार की कमी उन्हें गलत रास्ते की ओर धकेलती है। राजनीतिक वादों के बावजूद ठोस पहल नहीं हुई। बेरोजगारी भत्ता सीमित है, जिससे नाराजगी है। उद्योग को लेकर मतभेद भी हैं। अब युवा ठोस समाधान चाहते हैं।

कार्रवाई के बाद भी बेखौफ रेत माफिया, रातभर चलता रहा अवैध खनन

बस्तर। खनिज विभाग की कार्रवाई के बावजूद बकावंड में रेत माफिया सक्रिय हैं। दिन में छापेमारी के बाद रात में फिर खनन शुरू हो गया। बनियागांव और बोरगांव में भास्कली नदी से रातभर रेत निकाली गई। माफिया प्रशासन को चुनौती दे रहे हैं। ग्रामीणों को धमकाया जा रहा है। मिलीभगत के आरोप भी लग रहे हैं। नगरनार प्लांट के लिए रेत की मांग से अवैध खनन बढ़ा है। एडवांस लेकर खनन कराने की बात सामने आई है। वीडियो बनाने वालों को धमकाया गया। प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीण कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

नियंत्रण कक्ष से कड़ी निगरानी, गैस और ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य

दंतेवाड़ा। जिले में एलपीजी गैस और पेट्रोल-डीजल की उपलब्धता सामान्य है। प्रशासन ने किसी भी कमी से इनकार किया है। 9 गैस एजेंसियां और 18 पेट्रोल पंप संचालित हैं। नियंत्रण कक्ष स्थापित कर निगरानी बढ़ाई गई है। उपभोक्ता शिकायत दर्ज करा सकते हैं। बुकिंग की समय सीमा तय की गई है। कालाबाजारी पर नजर रखी जा रही है। कई सिलेंडर जब्त किए गए। चारों विकासखंडों में समितियां बनाई गई हैं। पैनिक बुकिंग से बचने की अपील की गई है। आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है।

मेगा हेल्थ कैंप में रिकॉर्ड भीड़, एक दिन में 7 हजार मरीजों का इलाज

जगदलपुर। जिला प्रशासन और पुलिस के संयुक्त प्रयास से आयोजित हेल्थ कैंप में पहले दिन 7 हजार से अधिक मरीजों ने इलाज कराया। मिनी स्टेडियम में सुबह से रात तक शिविर चला। विशेषज्ञ डॉक्टरों ने निशुल्क जांच और दवा दी। एक ही स्थान पर सभी सुविधाएं मिलने से राहत मिली। पहले नक्सल प्रभाव के कारण सेवाएं सीमित थीं, अब हालात बदल रहे हैं। ग्रामीणों का भरोसा बढ़ा है। 32 विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने सेवाएं दीं। एक बुजुर्ग महिला ने पहली बार आधुनिक इलाज कराया। यह पहल आगे भी जारी रहेगी। स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार दिख रहा है।

विकास की रफ्तार तेज, नक्सल प्रभाव घटने से गांवों में लौटी जिंदगी

सुकमा। सुकमा में नक्सल प्रभाव कम होने के साथ विकास कार्यों ने गति पकड़ ली है। प्रशासन अब सैचुरेशन मोड में योजनाओं को लागू कर रहा है। गांवों में स्कूल, आंगनबाड़ी और स्वास्थ्य केंद्र बनाए जा रहे हैं। सड़क, बिजली और पानी पर तेजी से काम हो रहा है। दोरनापाल से जगरगुंडा सड़क अंतिम चरण में है। जल जीवन मिशन के तहत हर घर पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। जगरगुंडा को एजुकेशन सिटी के रूप में विकसित किया जा रहा है। 2006 में बंद हुए 123 स्कूल अब फिर से चालू हो गए हैं। ग्रामीण जीवन में सकारात्मक बदलाव दिख रहा है। बच्चे स्कूल लौट रहे हैं और लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। विकास अब जमीन पर नजर आ रहा है।