आशुतोष तिवारी, जगदलपुर। बस्तर में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत एक नई और रणनीतिक पहल शुरू की जा रही है। सरेंडर कर चुके पूर्व नक्सली अब सुरक्षाबलों के जवानों को जंगल वॉरफेयर की बारीकियां सिखाएंगे। इसके लिए कांकेर स्थित काउंटर टेररिज्म एंड जंगल वॉरफेयर कॉलेज में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

जानकारी के मुताबिक, सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर और नारायणपुर जिलों से सरेंडर कर चुके 18 पूर्व नक्सलियों को इस ट्रेनिंग के लिए शामिल किया जाएगा। ये सभी नक्सली गुरिल्ला युद्ध, आईईडी (IED) बनाने और जंगलों में उन्हें प्लांट करने जैसी तकनीकों में माहिर रहे हैं। अब इन्हीं अनुभवों का इस्तेमाल कर जवानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इस पहल के तहत जवानों को नक्सलियों के काम करने के तरीकों, खासकर बारूदी सुरंग (IED) लगाने और उसे निष्क्रिय करने की तकनीक सिखाई जाएगी। इससे सुरक्षाबलों को ऑपरेशन के दौरान अधिक सतर्कता और सफलता मिलने की उम्मीद है।

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बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि इस प्रशिक्षण के माध्यम से जवान नक्सलियों द्वारा आईईडी लगाने के तरीके को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व में कई बार आईईडी की रिकवरी के दौरान चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, लेकिन अब इस तरह की ट्रेनिंग से जवानों की क्षमता और सुरक्षा दोनों में बढ़ोतरी होगी।

गौरतलब है कि बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों द्वारा बिछाए गए बारूदी जाल को निष्क्रिय करने के लिए उनके पूर्व साथियों की मदद लेना एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ साबित हो सकता है। इससे न केवल सुरक्षाबलों को रणनीतिक बढ़त मिलेगी, बल्कि नक्सल उन्मूलन अभियान को भी नई दिशा मिलेगी।

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