बेशक खाइए-खिलाइए अंडे पर खाने से पहले यह जरूर जान लें, अंडा-मुर्गा खाना छोड़ देंगे …

रायपुर। अंडों को खिलाने के ऊपर चल रहे विवाद के चलते पीपल फॉर एनीमल (मेनका गांधी की संस्था) रायपुर इकाई की कस्तूरी बलाल ने बताया की बहुत सारे लोग यह नहीं जानते कि भारतीय पोल्ट्री में पाई जाने वाली मुर्गियां व अंडे बहुत ही निम्न गुणवत्ता के होते हैं. भारतीय पोल्ट्री दुनिया के सबसे खराब पोल्ट्री में आती है. हमारे यहां मुर्गियों के साथ अत्याचार होता है जो कि हिंसा की श्रेणी में आता है. मुर्गियों को इतने पास पास रखा जाता है कि वह ढंग से घूम भी नहीं पाती, जिस जगह रखा जाता है वह बहुत ही ज्यादा गंदी रहती है. वहां पर ना को पर्याप्त हवा होती है ना सूर्य की रोशनी. मुर्गियों को लगातार लाइट के उजाले में रखा जाता है जिस वे ज्यादा अंडे दे सके. मुर्गियों को खाने में मरी मुर्गियों का मांस, रसायन में मिलाकर दिया जाता है, साथ में एंटीबायोटिक दिए जाते हैं. यह मुर्गियां अपने ही मल की गंदगी पर बैठती है, जिससे उन्हें घाव हो जाते हैं; अमूमन विभिन्न प्रकार के कीड़े लग जाते हैं.

कस्तूरी बल्लाल

इन मुर्गियों में ब्रोंकाइटिस, इनफ्लुएंजा न्यू कैटल डिजीज, Salmonella (एक प्रकार का बैक्टीरिया जिससे टाइफाइड तथा पानी जनित रोग होते हैं) पाया जाता है.

कम न्यूट्रिशन का अर्थात कम पोशक आहार देने से मुर्गियों के अंडों के शैल (अंडे का बाहरी हिस्सा) कमजोर हो जाते हैं जिससे जिससे बाहर पाए जाने वाले बैक्टीरिया अंडे के अंदर चले जाते हैं. मुर्गियों को दी जाने वाली एंटीबायोटिक की कुछ मात्रा भी अंडो के अंदर चली जाती है, इनका असर अंडे के गर्म करने पर भी खत्म नहीं होता. लगातार ऐसे अंडों को खाने से मानव में उन एंटीबायोटिक्स के लिए रेजिस्टेंस डिवेलप हो जाता है जो अंडों के खाने के कारण मानव शरीर के अंदर पहुंच जाते हैं.

विभिन्न रिसर्च में ऐसी मुर्गियों के अंडों में विभिन्न प्रकार के पेस्टिसाइड जैसे DDT, HCH, भारी मेटल जैसे लेड, केडीलियम पाए गए हैं. मानव शरीर पर इनका असर दूरगामी होता है धीरे-धीरे यह मानव के किसी भी अंग को जैसे किडनी इत्यादि को नुकसान पहुंचाती है. बच्चों का रेजिस्टेंस कम होता है अतः उन्हें नुकसान पहुंचने की ज्यादा संभावना रहती है.

बलाल ने जनता से आग्रह किया कि पहले मुर्गियों के प्रति किए जाएं रहे अत्याचार के विरुद्ध आवाज उठाएं और उसके लिए सफल उपाय अंडों का बहिष्कार है.

बलाल ने बताया कि जिस प्रकार अंडों का सेवन करने से मानव शरीर को नुकसान पहुंचता है उसी प्रकार मुर्गियों के फ्लैश में भी विभिन्न प्रकार के बैक्टीरिया एवं ऐसे नुकसानदायक तत्व रहते हैं जिससे मानव शरीर को बहुत नुकसान पहुंचता है.

कस्तूरी ने कहा कि मुर्गियों को मोटरसाइकिल में उल्टा लटकाकर ले जाया जाता है यह मुर्गियों से पोल्ट्री फार्म के बाहर किया जाने वाला अत्याचार होता है, उन मुर्गियों को पहुंचने वाले अघात को मानव को समझना चाहिए, जबकि मुर्गियां अत्यंत ही होशियार प्राणियों की श्रेणी में आती है. भारत सरकार ने मुर्गियों के हित के लिए नियम बना रखे हैं जिनका पालन नहीं किया जाता और ना ही उसके लिए आवाज उठाई जाती है. मुर्गियों में भी जान होती है इन अत्याचारों और हिंसा को रोकने का सफल तरीका यह है कि हम मुर्गियों का फ्लैश और अंडा खाना बंद कर दें.

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