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भानुप्रतापपुर उपचुनाव : प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद, 8 को आएगा नतीजा, जानिए चुनावी प्रचार में कैसी रही उम्मीदवारों की दिनचर्या…

भानुप्रतापपुर/कांकेर. भानुप्रतापपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए मतदान सोमवार को हुआ. मतगणना होना शेष है. इस उपचुनाव में सभी प्रत्याशी अपने-अपने जीत का दावा कर रहे हैं. सभी प्रत्याशियों के किस्मत का फैसला ईवीएम में बंद है, जो अगले 8 दिसंबर को खुलेगा. इस चुनाव की दौड़ भाग में प्रत्याशियों की दिनचर्या कैसी रही, इसके बारे में लल्लूराम डाॅट काॅम ने प्रत्याशियों से खास बातचीत की.

पूरी नहीं होती थी नींद, खाने के लिए नहीं मिलता था समय : सावित्री

कांग्रेस प्रत्याशी सावित्री मंडावी ने बातचीत में बताया कि वह मूल रूप से ग्रहणी ही थी. अचानक राजनीति में आई. आते ही चुनाव प्रचार प्रसार करना पड़ा. दिन रात पैदल चलना, नींद पूरी नहीं होना, खाने के लिए समय नहीं मिलना, यह सब तो इन 20 दिनों में था ही, परंतु विधानसभा के मतदाताओं के प्यार में मैं अपना दुख दर्द सब भूल गई. उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर महिलाएं रोती हुई मिलती थी. विलाप करती हुई मिलती थी. इन सबने मुझे बहुत हिम्मत और साहस दिया.

दिमाग में कई तनाव था, कभी खाना नहीं होता था नसीब : नेताम

वहीं भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी ब्रह्मानंद नेताम ने कहा कि प्रतिदिन 20-25 किलोमीटर पैदल चलता था. रात को दिमाग में कई तनाव, नींद नहीं आना, कभी भोजन नहीं मिलना, फिर भी अनवरत चलता रहा. बिना थके मतदाताओं से मिलता रहा.

प्रचार वाहन में ही सोता रहा: कोर्राम

सर्व आदिवासी समाज के प्रत्याशी अकबर राम कोर्राम ने बताया कि लंबी शासकीय सेवा के अंतराल के बाद राजनीति में उतरना एक चुनौती था पर प्रचार-प्रसार के इन पूरे दिनों में मैं अपने प्रचार वाहन में ही सोता रहा. मूंगफली, चना आदि खाकर भूख मिटाई. नींद का तो प्रश्न ही नहीं उठता था और प्रतिदिन 20 से 25 मीटर पैदल चलना पड़ता था.

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