हेमंत शर्मा, नई दिल्ली/धार। Supreme Court On Bhojshala: भोजशाला–सरस्वती मंदिर विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट इंदौर के 11 मार्च 2024 को दिए गए अंतरिम आदेश के खिलाफ दायर अपील का निस्तारण करते हुए कहा है कि अब मूल रिट याचिका क्रमांक 10497/2022 की सुनवाई हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच करेगी। इस बेंच की अध्यक्षता अधिमानतः मुख्य न्यायाधीश या वरिष्ठतम न्यायाधीश करेंगे।

मामला मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसायटी बनाम हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस एवं अन्य के रूप में सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। याचिकाकर्ता आशीष गोयल (धार) ने बताया कि हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने पैरवी की।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की सर्वे रिपोर्ट को तीन सप्ताह के भीतर खुले न्यायालय में खोला जाए और उसकी प्रतियां दोनों पक्षों को उपलब्ध कराई जाएं। यदि रिपोर्ट का कोई हिस्सा कॉपी योग्य नहीं हो, तो संबंधित पक्षों को विशेषज्ञों और वकीलों की मौजूदगी में उसका निरीक्षण करने की अनुमति दी जाएगी। रिपोर्ट पर आपत्तियां या सुझाव दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय भी दिया गया है।

अदालत ने साफ किया है कि हाईकोर्ट अंतिम सुनवाई के दौरान सभी पक्षों के तर्कों पर विचार करेगा। साथ ही, अंतिम निर्णय आने तक भोजशाला की संरचना और वर्तमान स्वरूप में किसी भी तरह का बदलाव नहीं किया जाएगा। एएसआई के महानिदेशक द्वारा 7 अप्रैल 2003 को जारी आदेश भी यथावत लागू रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और सभी कानूनी दलीलें हाईकोर्ट के सामने खुली रहेंगी।

हाईकोर्ट में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता विनय जोशी (इंदौर) करेंगे। याचिकाकर्ता आशीष गोयल ने कहा कि एएसआई द्वारा किए गए लंबे सर्वे के आधार पर अब हाईकोर्ट भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर सुनवाई करेगा। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण कानूनी प्रगति बताया, हालांकि मामले का अंतिम निर्णय अब हाईकोर्ट के आदेश पर निर्भर करेगा।

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