विशेष टिप्पणी : ‘भूपेश बघेल तीन महीने में ही देश मे सबसे बड़े फायरब्रांड मुख्यमंत्री के तौर पर स्थापित हो चुके हैं’-आसिफ़ मेमन

रायपुर. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल देश के इकलौते फायरब्रांड नेता हैं.. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टाटा के लिए अधिग्रहित ज़मीन वापस करके, किसानों से किए गए वादों को तत्काल पूरा करके और अधिकारियों पर अंकुश लगाकर जो तेज़ी दिखाई है. उसकी मिसाल मुश्किल है. तेज़ी से अमल में लाए गए इन फैसलों ने भूपेश बघेल को एक नायक के तौर पर स्थापित किया है.

आसिफ़ मेमन

ये कहा जा रहा था कि भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके आक्रामक तेवर ढीले पड़ेंगे लेकिन उनके तेवरों की आक्रमकता मुख्यमंत्री बनने के बाद भी ज्यों की त्यों बरकरार है. भूपेश बघेल ने राहुल गांधी की तर्ज पर आरएसएस और बीजेपी के बड़े नेताओं पर तीखे हमले किए. बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को आपराधिक प्रवृत्ति और तड़ीपार बताने में कोई संकोच नहीं किया. उनके काम करने की तेज़ी और बयानों ने भूपेश बघेल को बेहद कम समय में देश का इकलौते  फायरब्रांड नेताओं में स्थापित कर दिया है.

देश में सबसे बड़ा फायरब्रांड नेता बीजेपी यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बताती है. लेकिन मुख्यमंत्री के तौर पर उन्होंने जुबानी जमाखर्च करने और नाम बदलने के अलावा कोई उपलब्धि हासिल नहीं की है. जबकि जबकि भूपेश बघेल अपने फैसलों से राज्य के गरीब, किसान की ज़िंदगी बदल रहे हैं.

देश में भूपेश बघेल के अलावा राजस्थान में अशोक गहलोत, मध्यप्रदेश में कमलनाथ और पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह कांग्रेसी मुख्यमंत्री हैं. कर्नाटक में कांग्रेस के सहयोग से जेडीएस के कुमारस्वामी मुख्यमंत्री हैं. इसके अलावा केंद्र शासित राज्य पुंडुचेरी में नारायण शामी कांग्रेस के मुख्यमंत्री हैं. इन सबमें भूपेश बघेल आगे निकल चुके हैं.

भूपेश बघेल के तेज़ी से बढ़ते कद के सामने छत्तीसगढ़ का विपक्ष लगातार बौना साबित होता दिख रहा है. पूरे देश में काँग्रेस के मुख्यमंत्रियों में भूपेश बघेल अकेले हैं जो आज भी युवा काँग्रेस के काल में बनी तेज़ तर्रार छवि को कायम रखे हुए हैं.

भूपेश की नई छवि का फायदा पार्टी को अन्य राज्यों में इस लोकसभा चुनाव में होगा. वे चुनाव की घोषणा से पहले ही बीजेपी के सबसे बड़े फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ के गढ़ में तीन बार दहाड़ आए हैं. वे बिहार में भी कांग्रेस के चेहरे बने हुए हैं. वे तेज़ी से पिछड़ों के बड़े नेता के रुप में स्थापित हो रहे हैं. बिहार सहित देश के सबसे बड़े राज्य उप्र में ओबीसी वोटरों को अपनी तरफ करने के लिए कांग्रेस को एक तेज़ तर्रार चेहरा मिल गया है

साठ दिन के अपने कार्यकाल में ही भूपेश बघेल अपने पूर्ववर्तियों से काफी आगे निकल चुके हैं. जिस तेज़ी से उन्होंने अलग-अलग मोर्चों पर अपनी कामयाबी का परचम लहराया है, वो बेमिसाल है.

एक माह पूर्व ही उन्होंने बोलने के मामले में माहिर माने जाने वाले अजीत जोगी की बोलती बंद कर दी थी. ठीक उसी तरह, जिस तरीके से विधानसभा चुनाव में की थी. राज्य के एक प्रमुख दैनिक अखबार के कार्यक्रम में राज्य के पहले, दूसरे और तीसरे मुख्यमंत्री मौजूद थे. दीप प्रज्ववलन कर अपने स्थान पर लौटते मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी ने चुटकी लेते हुए कहा था, “जला दिया”.  इस पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि ”हाँ! मैंने जला दिया. किसी ने चौथी बार सरकार बनाने का सपना देखा था तो किसी ने नई पार्टी के साथ सरकार बनाने का सपना देखा था, मैंने उन सभी सपनो को जला दिया.”

लेखक आसिफ मेमन कांग्रेस से जुड़े हैं. ये उनके निजी विचार हैं. 

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