BIG NEWS: ओमीक्रोन के कारण भोपाल में ‘तब्लीगी इज्तिमा’ पर संकट!, बीजेपी नेताओं ने एसीएस सुलेमान से आयोजन पर विचार करने कहा, कोरोना के कारण पिछले साल भी नहीं हुआ था

राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। कोरोना के नए वेरिएंट ‘ओमीक्रोन’ ( Coronavirus New Variant Omicron) राजधानी भोपाल में होने वाले मुस्लिम समाज का दुनिया का दूसरा बड़ा धार्मिक समागम आलमी तब्लीगी इज्तिमा पर इस बार भी ग्रहण लगा सकता है। बीजेपी प्रवक्ता डाॅ. विशेष बाजपेयी और भाजपा विधायक रामेश्नवर शर्मा ने स्वास्थ्य विभाग के एसीएस मोहम्मद सुलेमान से आयोजन पर पुनर्विचार करने की मांग की है। 

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बीजेपी प्रवक्ता डाॅ. हितेष बाजपेयी (BJP Spokesperson Dr Hitesh Bajpai)  ने कहा कि हेल्थ एसीएस ने जनवरी में नया वैरिएंट आने की बात कही है। थर्ड वेब की आहट के बीच राजधानी भोपाल में होने वाले इज्तिमा पर पुनर्विचार किया जाए।

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भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि तब्लीगी इज्तिमा में विदेशों से बहुत लोग आते हैं। अनस्क्रीन लोग भोपाल आते हैं। ऐसे में टेस्टिंग करना संभव नहीं है। विश्व में कोरोना के नए वेरिएंट के कारण हड़कंप मचा हुआ है। भारत में भी इसे लेकर एसओपी जारी की गई है। विदेश से आने वालों की जांच की जा रही है। आयोजन को लेकर सुलेमान साहब समीक्षा करें। इज्तिमा को लेकर  पुनर्विचार करने का समय है। वहीं बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा (BJP MLA Rameshwar Sharma) ने भी बीजेपी प्रवक्ता डाॅ. विशेष बाजपेयी का समर्थन किया है।

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दुनियाभर से 10 लाख जमात शामिल होते हैं

बता दें कि भोपाल में  दुनियां का सबसे बड़ा तब्लीगी इज्तिमा लगता है। इज्तिमा में देश-विदेश से हजारों जमाते शिरकत करते हैं। दिसंबऱ-जनवरी में हर साल इज्तिमा का आयोजन होता है। कई देशों में ओमिक्रोन वैरिएंट फैलने से इज्तिमा पर रोक लगाने की मांग उठने लगी है। पिछले साल भी  कोविड 19 के चलते नवंबर में मुस्लिम समाज का दुनियां का दूसरा बड़ा धार्मिक समागम आलमी तब्लीगी इज्तिमा नहीं हो पाया था। भोपाल के 72 साल के इतिहास में ये पहला मौका था, जब  इज्तिमा स्थगित किया गया था। मुस्लिम समाज का ये सालाना धार्मिक कार्यक्रम हर साल भोपाल में होता है। इसमें दुनियाभर से 10 लाख जमात शामिल होते हैं। इसमें 4 दिन तक मजहबी तकरीरें होती हैं।

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जानिए क्या है इज्तिमा

इज्तिमा अरबी भाषा का एक शब्द है जिसका मतलब कई लोगों का एक जगह पर इकट्ठा होना है। एक खास जगह पर इकट्ठा होकर इबादत करना, खैर-बरक़त की दुआ करना, गुनाहों की माफी माँगना और दीनी बातें करना इज़्तिमा का हिस्सा है।

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