भागलपुर/अतीश दीपंकर। जिले के सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में फल प्रसंस्करण एवं संरक्षण विषय पर प्रगतिशील महिला किसानों के लिए तीन दिवसीय व्यावहारिक (हैंड्स-ऑन) प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम (FFP) के अंतर्गत आयोजित किया गया है, जिसका उद्देश्य महिला किसानों को खाद्य प्रसंस्करण की आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी आय बढ़ाना और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है।

विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी.आर. सिंह ने कार्यक्रम का मार्गदर्शन करते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनने और मूल्य संवर्धन के माध्यम से आय दोगुनी करने के लिए प्रेरित किया। उद्घाटन समारोह में नोडल अधिकारी डॉ. एस.के. पाठक, परियोजना अन्वेषक डॉ. रामानुज विश्वकर्मा, सह-परियोजना अन्वेषक डॉ. विजय कुमार, डॉ. अनित कुमार, डॉ. ज्योतिमाला साहू, विभागाध्यक्ष डॉ. वसीम सिद्दीकी, मुख्य वैज्ञानिक डॉ. एम.ए. आफताब सहित बड़ी संख्या में महिला किसान मौजूद रहीं।
डॉ. रामानुज विश्वकर्मा ने किसान प्रथम कार्यक्रम की गतिविधियों और उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। डॉ. वसीम सिद्दीकी ने जैम, जेली, स्क्वैश, अचार, चटनी, फ्रूट पल्प और सब्जियों के सुखाने जैसे मूल्यवर्धित उत्पादों की उपयोगिता बताई। वहीं, डॉ. अनित कुमार ने सफाई, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, भंडारण, गुणवत्ता नियंत्रण और विपणन की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी।

तीन दिवसीय प्रशिक्षण के माध्यम से महिला किसानों को वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी आय, जीवन स्तर और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। किसानों ने इस पहल को उपयोगी बताते हुए विश्वविद्यालय की सराहना की।