पटना। बिहार की राजनीति में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई बगावत का असर अब स्पष्ट रूप से नजर आने लगा है। नीतीश सरकार ने अपनी ही पार्टियों से बगावत करने वाले राजद और कांग्रेस के विधायकों को विधानसभा समितियों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देकर उन्हें पुरस्कृत किया है।

​राज्यसभा चुनाव में बगावत का मिला इनाम

​हाल ही में संपन्न हुए राज्यसभा चुनाव के दौरान जिन्होंने राजद और कांग्रेस के खिलाफ जाकर सत्ता पक्ष का समर्थन किया था, उन्हें विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बड़ा सम्मान दिया है। सरकार का यह कदम साफ तौर पर उन विधायकों के प्रति आभार व्यक्त करने जैसा है, जिन्होंने संकट के समय पाला बदलकर गठबंधन को मजबूती प्रदान की थी।

​बागी विधायकों को मिली अहम कमान

​विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, राजद के बागी विधायक फैसल रहमान को गैर सरकारी विधेयक एवं संकल्प समिति का सभापति नियुक्त किया गया है। वहीं, कांग्रेस का साथ छोड़ने वाले विधायक मनोहर प्रसाद सिंह को प्रत्यायुक्त विधान समिति की कमान सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, हम (से) की विधायक ज्योति देवी को पुस्तकालय समिति और रालोमो के माधव आनंद को शून्यकाल समिति का सभापति बनाया गया है।

​समितियों का पुनर्गठन और अध्यक्ष की भूमिका

​बिहार विधानसभा की कुल 26 समितियों में से फिलहाल 20 समितियों का पुनर्गठन किया गया है। महत्वपूर्ण बात यह है कि तीन मुख्य समितियों नियम समिति, सामान्य प्रयोजन समिति और विशेषाधिकार समिति के सभापति स्वयं विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार होंगे। अभी तीन अन्य समितियों (आवास, आंतरिक संसाधन और कृषि उद्योग विकास) का गठन होना शेष है।

​विपक्ष को तोड़ने की सोची-समझी रणनीति

​इन नियुक्तियों के पीछे गहरे राजनीतिक मायने छिपे हैं। बागियों को सभापति का पद देना न केवल मौजूदा गठबंधन को स्थिर करने की कोशिश है, बल्कि भविष्य के लिए भी विपक्षी खेमे में सेंधमारी के दरवाजे खुले रखने का एक संकेत है। यह पुरस्कार देकर सरकार ने यह संदेश दिया है कि सत्ता का साथ देने वालों का पूरा ख्याल रखा जाएगा।