कुंदन कुमार/ पटना। बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर जारी बहस ने अब एक नया और विवादित मोड़ ले लिया है। बजट सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार को घेरते हुए कानून की विफलता पर तीखे सवाल दागे हैं। बिहार विधानसभा के बजट सत्र में कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन ने शराबबंदी कानून को लेकर नीतीश सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि राज्य में शराबबंदी केवल कागजों तक सीमित रह गई है। विधायक के अनुसार, प्रशासन के दावों के विपरीत, बिहार के गांवों से लेकर शहरों तक शराब की ‘होम डिलीवरी’ धड़ल्ले से जारी है। उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस पवित्र उद्देश्य के साथ इस कानून को लागू किया गया था, वह जमीनी स्तर पर पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।
विधायक की अनोखी चुनौती
सदन में हंगामे के बीच अभिषेक रंजन ने एक ऐसी चुनौती पेश की जिसने सत्तापक्ष को असहज कर दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को कानून की सफलता पर इतना ही भरोसा है, तो सदन में मौजूद सभी माननीय सदस्यों का डीएनए या ब्लड टेस्ट करवा लिया जाए। विधायक का दावा है कि इस जांच से दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा और शराबबंदी की असली सच्चाई जनता के सामने आ जाएगी।
समीक्षा से कतरा रही है सरकार?
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि शराबबंदी के कारण न केवल राजस्व का नुकसान हो रहा है, बल्कि अवैध शराब के कारोबार ने एक नया माफिया तंत्र खड़ा कर दिया है। इसके बावजूद, सरकार इस कानून की विफलता पर किसी भी प्रकार की समीक्षा करने को तैयार नहीं है। विपक्ष का मानना है कि यह कानून अब केवल आम जनता के उत्पीड़न का जरिया बन गया है।
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