पटना। बिहार विधानसभा में सोमवार को एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला, जब विधायक निधि को सालाना 4 करोड़ से बढ़ाकर 8 करोड़ रुपये करने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक एकजुट हो गए। सदन में विधायकों ने तर्क दिया कि क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए वर्तमान राशि पर्याप्त नहीं है।
मंत्री की शर्त: केंद्र बढ़ाएगा तो राज्य भी सोचेगा
योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव शुरुआत में निधि बढ़ाने के पक्ष में नहीं थे। हंगामे और विधायकों के भारी दबाव के बीच उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार सांसद निधि में बढ़ोतरी करती है, तो बिहार सरकार भी विधायक निधि बढ़ाने पर विचार करेगी। अंत में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हस्तक्षेप करते हुए आश्वासन दिया कि सदन की इस भावना से मुख्यमंत्री को अवगत कराया जाएगा।
2026 तक विकसित बिहार का लक्ष्य
बजट चर्चा के दौरान वित्त मंत्री बिजेंद्र यादव ने विपक्षी दावों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत है। उन्होंने विनियोग विधेयक-2026 पेश किया, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से पारित कर दिया। मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार के पास धन की कमी नहीं है और 2026 तक विकसित बिहार का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाएगा। उन्होंने विपक्ष के 18% राजकोषीय घाटे के आरोप को गलत बताते हुए स्पष्ट किया कि यह मात्र 3% है।
विपक्ष और विधायकों के तीखे तेवर
विपक्ष की ओर से राजद विधायक कुमार सर्वजीत ने सरकार को घेरते हुए कहा कि विकास केवल कागजों पर है और बजट में रोजगार का रोडमैप गायब है। वहीं, भाजपा विधायक नीरज कुमार बबलू और भाकपा-माले के अरुण कुमार ने भी फंड की कमी पर नाराजगी जताई। माले विधायक ने यहां तक कह दिया कि या तो फंड बढ़ाया जाए या इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया जाए।
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