पटना। ​बिहार विधानमंडल के बजट सत्र के अंतिम दिन सदन के भीतर और बाहर भारी राजनीतिक गहमागहमी देखी गई। एक ओर जहां विपक्षी दल राजद ने सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप जड़े, वहीं भाजपा विधायकों ने बिहार में बढ़ते धर्मांतरण को लेकर सख्त कानून की मांग उठाकर नया मोर्चा खोल दिया।

​भ्रष्टाचार के आरोपों से घेरा

​कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजद एमएलसी सुनील सिंह ने डेटा पेश करते हुए जदयू पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि जदयू ‘हिरण का चोला पहनकर भेड़िए’ जैसा काम कर रही है। सिंह ने दावा किया कि जदयू ने स्मार्ट मीटर और ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर भारी वसूली की है। उन्होंने दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि कम टर्नओवर वाली कंपनियों ने जदयू को करोड़ों का फंड दिया और किंग महेंद्र से हर महीने 99 लाख रुपये लिए जाते हैं। साथ ही, उन्होंने भाजपा पर शराब माफिया से सांठगांठ का आरोप भी लगाया।

​धर्मांतरण पर कड़े कानून की मांग

​सदन के भीतर भाजपा विधायक वीरेंद्र कुमार समेत 12 विधायकों ने राज्य में लव जिहाद और ईसाई मिशनरियों द्वारा कराए जा रहे धर्मांतरण पर चिंता जताई। विधायकों ने दावा किया कि बिहार में ईसाइयों की विकास दर (143.23%) राष्ट्रीय औसत (15.52%) से कहीं अधिक है। उन्होंने सीमावर्ती जिलों में मुस्लिम आबादी में अप्रत्याशित वृद्धि का मुद्दा भी उठाया। भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने तर्क दिया कि जब संविधान जाति बदलने की अनुमति नहीं देता, तो धर्म बदलने और आरक्षण का लाभ लेने की छूट कैसे मिल सकती है?

​सरकार का रुख और स्पीकर का निर्देश

​इन तीखे सवालों पर प्रभारी गृह मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने स्पष्ट किया कि फिलहाल राज्य में धर्म परिवर्तन रोकने संबंधी कोई नया कानून विचाराधीन नहीं है। हालांकि, मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा स्पीकर ने सरकार को इस पूरे विषय की समीक्षा करने का निर्देश दिया है।