कुंदन कुमार/पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सदन के भीतर और बाहर राजनीतिक पारा अपने चरम पर है। राज्य में बढ़ते अपराध, आरक्षण सीमा में विस्तार और हालिया बुलडोजर कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हाथ में तख्तियां लिए विपक्षी विधायकों ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और नीतिगत फैसलों पर कड़ा ऐतराज जताया।
दलितों और भूमिहीनों के मुद्दे पर तकरार
विपक्ष का सबसे तीखा हमला भूमिहीन दलित परिवारों पर हुई कथित बुलडोजर कार्रवाई को लेकर रहा। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों को छत देने के बजाय उन्हें उजाड़ने का काम कर रही है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह सरकार दलित विरोधी है और उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है। विपक्ष ने स्पष्ट चेतावनी दी कि दलितों के घरों पर बुलडोजर चलाना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कानून-व्यवस्था और आरक्षण की मांग
सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष ने कानून-व्यवस्था और विफल शराबबंदी के मुद्दों पर घेराबंदी की। साथ ही, आरक्षण के प्रतिशत को बढ़ाने की मांग को लेकर भी दबाव बनाया गया। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्य में अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ा है और सरकार इसे नियंत्रित करने में विफल रही है।
राज्यसभा सीट के लिए हलचल
दूसरी ओर, राज्यसभा की एक रिक्त सीट के लिए आज से नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के विधायक ने कहा कि उम्मीदवार के नाम पर अंतिम मुहर जल्द ही महागठबंधन के नेतृत्व द्वारा लगाई जाएगी। फिलहाल यह सस्पेंस बरकरार है कि यह सीट महागठबंधन के किस घटक दल के खाते में जाएगी।
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