पटना। जिले के बाढ़ अनुमंडल अंतर्गत अथमलगोला प्रखंड में फाइलेरिया बचाव अभियान के दौरान एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। यहां फाइलेरिया और पेट के कीड़े मारने की दवा खाने के बाद करीब 35 बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। बच्चों ने पेट दर्द, सिर दर्द और उल्टी की शिकायत की, जिसके बाद उन्हें आनन-फानन में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया।
स्कूलों में बांटी गई थी दवा
यह मामला रामनगर दियारा क्षेत्र के तीन सरकारी स्कूलों का है, जिनमें प्राथमिक विद्यालय गणपत राय टोला और अनुसूचित जाति प्राथमिक विद्यालय शामिल हैं। बताया जा रहा है कि दोपहर करीब 2 बजे आशा कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों को दवा खिलाई गई थी। दवा खाने के कुछ घंटों बाद ही बच्चों को असहजता महसूस होने लगी। देखते ही देखते कई बच्चों को उल्टियां होने लगीं, जिससे परिजनों और स्कूल प्रशासन में हड़कंप मच गया।
त्वरित कार्रवाई और उपचार
मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएचसी प्रभारी डॉ. अमन कुमार ने तत्काल क्विक रिस्पांस मेडिकल टीम को गांव भेजा। एम्बुलेंस के जरिए सभी पीड़ित बच्चों को अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों की कड़ी निगरानी में उपचार के बाद बच्चों की स्थिति में सुधार हुआ। प्राथमिक उपचार और ऑब्जर्वेशन के बाद सभी 35 बच्चों को सुरक्षित घर भेज दिया गया है।
परिजनों ने जताई चिंता
स्थानीय निवासी मालो देवी ने बताया कि उनके तीन बच्चे दवा खाने के बाद बीमार हो गए थे, लेकिन अब वे ठीक हैं। वहीं, पांचवीं कक्षा के छात्र साहिल कुमार ने बताया कि घर पहुंचते ही उसे तेज मतली और पेट में दर्द महसूस हुआ था। फिलहाल, सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं और स्थिति सामान्य बनी हुई है।
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