प्रमोद कुमार/ कैमूर। बिहार विधानसभा चुनाव के बाद से ही शांत दिख रही प्रदेश कांग्रेस के भीतर की अंतर्कलह अब खुलकर सड़कों पर आ गई है। पार्टी के वर्तमान प्रदेश नेतृत्व और कार्यप्रणाली से नाराज दिग्गज नेताओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। इसी कड़ी में कांग्रेस के समर्पित नेताओं ने ‘बिहार कांग्रेस बचाओ अभियान’ का बिगुल फूंक दिया है, जिसके तहत आगामी 17 मार्च को राजधानी पटना में एक विशाल महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
एकजुट हो रहे पुराने कांग्रेसी
अभियान को धार देने के लिए खगड़िया के पूर्व विधायक छत्रपति यादव और बिहार प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव नागेंद्र पासवान विकल कैमूर पहुंचे। यहां उन्होंने स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में बैठक की और संगठन की जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की। नेताओं ने स्पष्ट किया कि पार्टी इस समय ‘संक्रमण’ के दौर से गुजर रही है और अगर समय रहते पुराने व समर्पित कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं मिला, तो बिहार में कांग्रेस का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।
एजेंटों के हाथ में है कमान – छत्रपति यादव का बड़ा हमला
मीडिया से मुखातिब होते हुए पूर्व विधायक छत्रपति यादव ने प्रदेश अध्यक्ष और संगठन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा:
”विधानसभा चुनाव में जो हुआ, वह किसी से छिपा नहीं है। पार्टी के कुछ ‘एजेंट’ अपनी मनमानी कर रहे हैं। जो लोग जमीन पर कांग्रेस का झंडा ढोते हैं, उनकी कोई पूछ नहीं है। यहां तक कि दिल्ली आलाकमान के निर्देशों को भी बिहार में ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। आज हालात ऐसे हैं कि पुराने कांग्रेसियों को टिकट मिलना तो दूर, पार्टी में सम्मान तक नहीं मिल रहा।
17 मार्च को पटना में शक्ति प्रदर्शन
नागेंद्र पासवान विकल ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य पार्टी को गुटबाजी और मैनेजमेंट के चंगुल से छुड़ाकर असली कांग्रेसियों के हाथ में वापस सौंपना है। कैमूर के नेताओं को आमंत्रित करते हुए उन्होंने कहा कि 17 मार्च को पटना का महासम्मेलन बिहार कांग्रेस के भविष्य की नई दिशा तय करेगा। नेताओं का आरोप है कि चाटुकारिता के कारण समर्पित कार्यकर्ता घर बैठने को मजबूर हैं और पार्टी में नए लोगों का जुड़ाव लगभग रुक गया है।
अब देखना यह होगा कि इस बचाव अभियान और आगामी महासम्मेलन का प्रदेश आलाकमान और दिल्ली दरबार पर क्या असर पड़ता है। क्या बिहार कांग्रेस इस आंतरिक संक्रमण से उबर पाएगी या गुटबाजी की यह दरार और गहरी होगी?
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