पटना। ​बिहार के पर्यटन मानचित्र पर एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। राज्य में पहली बार ईको-टूरिज्म को बड़े स्तर पर बढ़ावा देते हुए पांच जिलों के जलाशयों को बर्ड वाचिंग के लिए तैयार किया गया है। अप्रैल महीने से पर्यटक जमुई, कटिहार, बेतिया, बेगूसराय और भोजपुर में दुर्लभ पक्षियों का दीदार कर सकेंगे।

​इन 5 वेटलैंड्स को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान

​पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने राज्य के पांच प्रमुख जलाशयों को रामसर साइट के रूप में विकसित किया है। इनमें शामिल हैं:
​नागी-नकटी (जमुई): यहां 150 से अधिक प्रजातियों के पक्षी आते हैं।
​कावर झील (बेगूसराय): 170 नस्ल के पक्षियों और 41 तरह की मछलियों का घर।
​गोगाबिल (कटिहार): गंगा और महानंदा से घिरी बेहद खूबसूरत झील।
​उदयपुर झील (बेतिया) और गोकुल जलाशय (भोजपुर)।

​पर्यटकों के लिए खास सुविधाएं

​बर्ड वाचिंग के अनुभव को यादगार बनाने के लिए विभाग हाई-टेक उपकरण उपलब्ध कराएगा। पर्यटकों को स्पॉटिंग स्कोप, दूरबीन, फील्ड गाइड बुक्स और कैमरे जैसी सुविधाएं मिलेंगी। खास बात यह है कि पक्षियों को अशांत होने से बचाने के लिए पर्यटकों को ‘डार्क शेड’ या काले कपड़ों के इस्तेमाल का सुझाव दिया गया है।

​दुर्लभ मेहमान: कॉमन मर्गेन्सर का बसेरा

​विशेषज्ञों के अनुसार, जमुई के नागी डैम में यूरोप और उत्तरी अमेरिका से आने वाली दुर्लभ कॉमन मर्गेन्सर (आरी चोंच बतख) देखी गई है। यह बतख करीब तीन महीने तक बिहार के वेटलैंड्स में प्रवास करती है।

​रोजगार और संरक्षण का संगम

​इस पहल से न केवल जैव विविधता का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। सालाना लगभग 6.60 करोड़ पर्यटकों की मेजबानी करने वाले बिहार के लिए यह कदम अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला साबित होगा।