पटना। नीतीश सरकार अब राज्य में हाईवे के साथ-साथ एक्सप्रेस-वे का नया नेटवर्क विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। प्रस्ताव के अनुसार बिहार में शुरुआत में 5 नए एक्सप्रेस-वे बनाए जाएंगे। इन सभी एक्सप्रेस-वे का स्वामित्व राज्य सरकार के पास होगा। इसका प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद एलाइनमेंट और डीपीआर (डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे जैसा मॉडल

बिहार में बनने वाले एक्सप्रेस-वे मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे के मॉडल पर आधारित होंगे। इन सड़कों पर वाहन न्यूनतम 100 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेंगे। निर्माण के लिए BOT (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल अपनाया जाएगा, जिसमें निजी कंपनियां सड़क का निर्माण करेंगी और तय अवधि तक टोल वसूलकर लागत और मुनाफा निकालेंगी।

ज्यादा टोल, लेकिन सरकार पर कम बोझ

BOT मॉडल के तहत सरकार को निर्माण में कम निवेश करना होगा। सड़क के संचालन, रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी भी निर्माण कंपनी की होगी। तय समय पूरा होने के बाद एक्सप्रेस-वे सरकार को सौंप दिया जाएगा। इस मॉडल के कारण आम लोगों को टोल के रूप में थोड़ा ज्यादा भुगतान करना पड़ सकता है।

कनेक्टिविटी बढ़ाने पर सरकार का फोकस

पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल के अनुसार, सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के किसी भी जिले से 5 घंटे के भीतर पटना पहुंचा जा सके। एक्सप्रेस-वे ऐसे बनाए जाएंगे, जिससे कई जिलों को एक साथ बेहतर कनेक्टिविटी मिल सके।