जुबैर अंसारी/सुपौल। जिले के अंतर्गत आने वाला वीरपुर अब जल्द ही आकाश की ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है। बिहार सरकार और भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अधीन एयरो क्लब ऑफ इंडिया (ACI) के बीच हुए एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) के बाद, वीरपुर हवाई अड्डे को राज्य के पहले फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर के रूप में विकसित करने की प्रक्रिया तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के विजन के अनुरूप, बिहार को देश का प्रमुख एविएशन हब बनाने की दिशा में यह एक निर्णायक कदम है।
एसीआई की टीम ने किया हवाई अड्डे का निरीक्षण
योजना को धरातल पर उतारने के लिए एयरो क्लब ऑफ इंडिया की छह सदस्यीय उच्च स्तरीय टीम ने हाल ही में वीरपुर हवाई अड्डे का गहन निरीक्षण किया। सचिव अरविंद बडोनी के नेतृत्व में आई इस टीम ने वहां उपलब्ध संसाधनों और भविष्य की संभावनाओं का आकलन किया। टीम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ जैसे अनिल वासन (FTO), इमो चाओबा सिंह (बैलूनिंग) और सुकुमार दास (पैरामोटर) शामिल थे, जिन्होंने तकनीकी बारीकियों का जायजा लिया।
सिर्फ पायलट ट्रेनिंग ही नहीं
- वीरपुर में प्रस्तावित यह केंद्र केवल पायलट प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रहेगा। इसे एक व्यापक एविएशन और एडवेंचर स्पोर्ट्स डेस्टिनेशन के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां एविएशन इंस्टीट्यूट के साथ-साथ:
- ग्लाइडिंग और स्काईडाइविंग
- पैराग्लाइडिंग और पैरासेलिंग
- बैलूनिंग और पावर्ड फ्लाइंग
- ड्रोन ट्रेनिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
सीमावर्ती क्षेत्र में आर्थिक और पर्यटन विकास की नई लहर
इंडो-नेपाल सीमा पर स्थित होने के कारण वीरपुर का यह प्रोजेक्ट सामरिक और आर्थिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, बल्कि पर्यटन और व्यापार को भी भारी बढ़ावा मिलेगा। सीमावर्ती इलाकों के युवाओं के लिए विमानन क्षेत्र में करियर बनाने का यह एक सुनहरा अवसर साबित होगा।
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