Bihar News: बिहार सरकार ने पशुपालन और कृषि से जुड़े मुद्दे को लेकर बड़ा ऐलान किया है। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा है कि, प्रशासनिक और जनसंपर्क में ‘नीलगाय’ शब्द का प्रयोग न किया जाए। बजट सत्र के दूसरे दिन यानी की आज डिप्टी सीएम ने कहा कि, ‘नीलगाय’ के स्थान पर ‘नील बकरी’ या ‘घोड़ पड़ास’ जैसे शब्दों का उपयोग किया जाए। ऐसा करने के पीछे उनका कहना है कि ‘गाय’ शब्द का प्रयोग इस संदर्भ में भावनात्मक और सांस्कृतिक दृष्टि से अन्य अर्थों को जन्म दे सकता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
विजय सिन्हा ने बताया कि यह मामला राज्य के लिए काफी संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि, न केवल कृषि और पशुपालन विभाग, बल्कि सभी संबंधित विभागों को इस विषय पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि, पूर्व समय भी इस पर कई बैठकें हुई थीं और इसे लेकर सुझाव दिए गए थे। वर्तमान कृषि मंत्री को भी इस मुद्दे से अवगत कराया गया है और उनसे कहा गया है कि इसे प्राथमिकता के आधार पर लागू करें।
उपमुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासनिक दस्तावेज, योजनाओं और मीडिया में ‘नीलगाय’ शब्द का प्रयोग न हो। इसके बजाय, ‘नील बकरी’ या ‘घोड़ पड़ास’ जैसे शब्दों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल शब्दों का परिवर्तन नहीं है, बल्कि समाज और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से बिहार में नीलगायों का शिकार बहुत तेजी से हो रहा है। ऐसे में मौजूदा समय या फिर आगे भविष्य में नीलगाय को लेकर कोई बवाल खड़ा न हो। कहा जा रहा है कि इसलिए सरकार ने नीलगाय की जगह नीलबकरी शब्द या घोर पड़ास शब्द का इस्तेमाल करने की बात कही है। बिहार के कई इलाकों में नीलगायों को मारने के लिए लोगों ने शूटर को भी हॉयर किया है। लोगों का कहना है कि नीलगायों की वजह से उनकी फसलों को भारी नुकसान हो रहा है।
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