कुंदन कुमार, पटना। बिहार के अब सरकारी डॉक्टर प्राइवेट क्लीनिक नहीं चला पाएंगे। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना जारी कर दिया है। शनिवार को स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी संकल्प के बाद अब मेडिकल कॉलेज जिला अस्पतालों और आई जी आई सी के डॉक्टर प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे।

सात निश्चय 3 के तहत फैसले को मंजूरी

सरकार ने सभी प्रमंडलीय आयुक्त डीएम एवं मेडिकल कॉलेज अधीक्षक को निर्देश दिया है कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। वहीं, नियम तोड़ने वाले डॉक्टरों पर सख्त विभाग के कार्रवाई की जाएगी। इसे लागू होने की तारीख और जिला गाइडलाइन जल्द घोषणा किया जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सात निश्चय तीन के तहत इस बड़े फैसले की मंजूरी दे दी गई है।

राज्य सरकार ने प्रदान की सहमति

राज्य सरकार के सात निश्चय 3 के अंतर्गत घोषित कार्यक्रम की कंडिका 5 (च) के तहत एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति अन्तर्गत कार्यरत् बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग, बिहार चिकित्सा शिक्षा सेवा संवर्ग तथा इंदिरा गांधी हृदय रोग संस्थान चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्सकों और चिकित्सक शिक्षकों के निजी प्रैक्टिस पर रोक लगाने हेतु स्वास्थ्य विभाग के प्रस्ताव पर राज्य सरकार द्वारा सहमति प्रदान की गई है।

मरीजों को मिलेगा बेहतर इलाज की सुविधा

उक्त के क्रियान्वयन एवं इसके लिए चिकित्सकों को गैर व्यावसायिक भत्ता व प्रोत्साहन राशि दिए जाने के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश सक्षम प्राधिकार के अनुमोदन के उपरांत अलग से निर्गत किया जाएगा। सरकार के इस कदम से अब यह साफ हो गया है कि, जो डॉक्टर सरकारी ड्यूटी पर होने के बावजूद निजी क्लिनिक या निजी प्रैक्टिस चला व कर रहे थे। वे अब यह सब नहीं कर पाएंगे और उनका सारा समय सरकारी अस्पताल में ही बीतेगी, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा मिल सकेगी।

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