कुंदन कुमार/पटना। बिहार में ज्वेलरी दुकानदारों द्वारा सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए हिजाब, नकाब, घूंघट, हेलमेट और मुरेठा पहनकर आने वाले ग्राहकों के प्रवेश पर रोक लगाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इसे भारत के संविधान और संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि सुरक्षा के नाम पर किसी विशेष परिधान को टारगेट करना धार्मिक भावना को आहत करने वाली कार्रवाई है और यह नागरिकों के मूल अधिकारों को कमजोर करने की साजिश जैसा प्रतीत होता है।
धार्मिक आजादी पर प्रहार — RJD
एजाज अहमद का आरोप है कि इस तरह के फैसले से सामाजिक सौहार्द प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि पहले से ही कुछ संगठन समाज को बांटने की कोशिश में लगे हैं और अब व्यापारी वर्ग के कुछ लोग उनके एजेंडे को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने ज्वेलरी कारोबारियों से अपील की कि ऐसे नोटिस वापस लिए जाएं और धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाए।
सुरक्षा को लेकर लिया गया निर्णय
उधर, सराफा कारोबारियों ने साफ किया है कि यह निर्णय किसी समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि राइजिंग क्राइम इंसीडेंट को देखते हुए उठाया गया कदम है। उनका कहना है कि हाल के वर्षों में लूट और चोरी के कई मामलों में अपराधी चेहरे ढककर दुकान में घुसते हैं और वारदात के बाद फरार हो जाते हैं, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।
चेहरा दिखाकर मिल सकेगी एंट्री
ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि ग्राहकों को केवल पहचान के लिए फेस विजिबल कराना होगा। इच्छुक ग्राहक चेहरा दिखाने के बाद सामान्य रूप से खरीदारी कर सकते हैं। कारोबारियों को उम्मीद है कि इस निर्णय से अपराध पर अंकुश लगेगा और बाजार का सुरक्षा माहौल मजबूत होगा।
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