पटना। बिहार में एलपीजी आपूर्ति व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर गई है। स्थिति यह है कि राज्य में कमर्शियल गैस की सप्लाई अस्थाई रूप से रोक दी गई है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के सामने संकट खड़ा हो गया है। वहीं, घरेलू उपभोक्ता डिजिटल सिस्टम की खामियों और वेंडरों की मनमानी के दोहरे जाल में फंस गए हैं।

​DAC कोड और सर्वर बना मुसीबत

​होली के बाद पटना समेत कई जिलों में बुकिंग के बावजूद डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (DAC) न मिलने से लोग एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। सर्वर ठप होने के कारण बुकिंग में 25 दिनों तक की देरी हो रही है, जिससे वेंडर अब उपभोक्ताओं से मनमाना पैसा वसूल रहे हैं। कई एजेंसियों में 1500 से अधिक सिलेंडरों का बैकलॉग हो चुका है।

छुट्टियां और मांग का असंतुलन

गैस एजेंसी संचालकों का तर्क है कि होली की छुट्टियों के कारण प्लांटों में रिफिलिंग प्रभावित हुई। अचानक बढ़ी मांग और आपूर्ति में कमी के कारण डिलीवरी 5 से 6 दिन पिछड़ गई है। हालांकि, IOCL के एरिया मैनेजर विनीत सेठ का दावा है कि घरेलू गैस की कमी नहीं है और जल्द ही स्थिति सामान्य कर ली जाएगी।

​कालाबाजारी पर प्रशासन की पैनी नजर

​खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति को देखते हुए स्पेशल ब्रांच ने पेट्रोलियम पदार्थों की कालाबाजारी की आशंका जताई है। इसके बाद पटना डीएम डॉ. त्यागराजन एसएम के निर्देश पर एडीएम सप्लाई की टीम ने एजेंसियों और गोदामों की सघन मॉनिटरिंग शुरू कर दी है। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य आपूर्ति श्रृंखला को दुरुस्त कर उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाना है।