पटना। बिहार राज्य अल्पसंख्यक आयोग ने ज्वेलरी दुकानों में बुर्का या नकाब पहनकर आने वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने से जुड़े बयान को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस मामले में पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को पत्र लिखकर ऑल इंडिया ज्वेलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन की बिहार इकाई के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

धार्मिक विवाद फैलाने का आरोप

आयोग ने अपने पत्र में कहा है कि अशोक कुमार वर्मा का बयान न केवल धार्मिक विवाद फैलाने वाला है, बल्कि समाज में आपसी सौहार्द को भी नुकसान पहुंचाने वाला है। आयोग के अनुसार, ज्वेलरी दुकानों में बुर्का या नकाब पहनने वाली महिलाओं के लिए नो एंट्री का नोटिस लगाने का आह्वान संवैधानिक मूल्यों के सीधे खिलाफ है।

संविधानिक अधिकारों के उल्लंघन की बात

आयोग ने स्पष्ट किया कि यह मामला सोशल मीडिया, न्यूज चैनलों और समाचार पत्रों में वायरल वीडियो और खबरों के माध्यम से उसके संज्ञान में आया। आयोग का मानना है कि इस तरह के बयान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) और अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों को प्राप्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

अपराध रोकने का गलत तर्क

आयोग ने कहा कि आत्मरक्षा के नाम पर किसी विशेष समुदाय की महिलाओं को अपराधी के रूप में पेश करना बेहद चिंताजनक है। उदाहरण देते हुए आयोग ने सवाल किया कि यदि अपराधी हेलमेट पहनकर वारदात करते हैं, तो क्या हेलमेट पहनने पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है? आयोग के अनुसार, अपराध रोकने के लिए निष्पक्ष और ठोस सुरक्षा उपाय जरूरी हैं, न कि किसी धर्म या पहनावे को निशाना बनाना।

सामाजिक तनाव की चेतावनी

आयोग ने चेतावनी दी कि इस तरह के बयान से बुर्का या नकाब पहनने वाली महिलाओं को शक की नजर से देखा जा सकता है, जिससे मानसिक प्रताड़ना और सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका है। यह स्थिति राज्य की शांति और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

अध्यक्ष बलियावी की कड़ी प्रतिक्रिया

आयोग के अध्यक्ष गुलाम रसूल बलियावी ने पटना के डीएम और एसपी को भी पत्र लिखकर इस फैसले की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को बुर्का या हिजाब पहनकर दुकानों में प्रवेश से रोकना गलत है और इससे उनके खिलाफ हीन भावना और टीका-टिप्पणी को बढ़ावा मिलेगा।