पटना। बिहार में आगामी पंचायत चुनाव 30 साल पुराने परिसीमन ढांचे पर ही कराए जाएंगे। वार्ड और पंचायत की सीमाओं में बदलाव नहीं होगा, लेकिन आरक्षण रोस्टर बदलेगा, जिससे कई सीटों की आरक्षित व सामान्य श्रेणी की स्थिति बदल सकती है। इस चुनाव में पहली बार पंचायत स्तर पर M-3 EVM का उपयोग किया जाएगा। राज्य भर में कुल 2,55,379 पदों पर मतदान होना है।
परिसीमन क्या है और क्यों जरूरी होता है?
पंचायत परिसीमन वह प्रक्रिया है, जिसके तहत ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, वार्ड और जिला परिषदों की भौगोलिक सीमाएं तय की जाती हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक प्रतिनिधि लगभग समान जनसंख्या का प्रतिनिधित्व करे। समय के साथ जनसंख्या बदलने पर परिसीमन जरूरी होता है, ताकि बड़े आकार वाली पंचायती इकाइयों को विभाजित कर नई इकाइयाँ बनाई जा सकें।
नया परिसीमन क्यों नहीं हो सका?
योजना थी कि 2026 का चुनाव नए परिसीमन आधार पर कराया जाए, परंतु 2021 की जनगणना पूरी न होने के कारण यह संभव नहीं हो पाया। मौजूदा आधिकारिक जनसंख्या आँकड़े 2011 के हैं, जो अब पुराने हो चुके हैं। इसीलिए आयोग ने फिलहाल पुराने परिसीमन पर चुनाव कराने का निर्णय लिया है।
आरक्षण रोस्टर में बड़ा बदलाव
बिहार पंचायत राज अधिनियम के अनुसार, आरक्षण रोस्टर हर दो चुनावों के बाद बदलता है। 2016 और 2021 में लागू रोस्टर की जगह अब नया रोस्टर लागू होगा। इससे कई सीटें सामान्य से आरक्षित या आरक्षित से सामान्य श्रेणी में जा सकती हैं। पंचायत चुनावों में कुल 50% आरक्षण की सीमा है। साथ ही महिलाओं के लिए भी 50% आरक्षण का प्रावधान जारी रहेगा।
पहली बार M-3 EVM से पंचायत चुनाव
इस बार पंचायत के सभी छह पदों—मुखिया, वार्ड सदस्य, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, सरपंच और पंच—के लिए EVM से मतदान होगा। इसके लिए 32,000 से अधिक M-3 EVM खरीदी जा रही हैं, जिन पर 64 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होगा। यह थर्ड-जनरेशन मशीन है, जिसमें 24 बैलेट यूनिट जोड़ी जा सकती हैं और अधिकतम 384 प्रत्याशी तक दर्ज किए जा सकते हैं। आयोग VVPAT के स्थान पर पूर्व की तरह टोटलाइजर सिस्टम का उपयोग करेगा।
2026 का चुनाव 2021 से अलग कैसे होगा?
इस बार चरणों की संख्या कम रहने की संभावना है। मतदान से लेकर काउंटिंग तक 100% वेबकास्टिंग और रियल-टाइम रिपोर्टिंग सिस्टम लागू किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया और पारदर्शी बन सके।
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