कुंदन कुमार/पटना। बिहार की राजधानी पटना समेत पूरा प्रदेश इन दिनों लोक आस्था के महापर्व चैती छठ के भक्तिमय रंग में डूबा हुआ है। आज महापर्व का तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। चारों ओर छठी मइया के पारंपरिक गीतों की गूंज है, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया है। आज शाम व्रत रखने वाले श्रद्धालु (व्रती) डूबते हुए सूर्य यानी अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित करेंगे।
सुबह से ही प्रसाद बनाने में जुटे श्रद्धालु
आज सुबह से ही राजधानी के घरों में उत्सव का माहौल है। व्रती महिलाएं और परिवार के सदस्य पूरी शुद्धता के साथ भगवान भास्कर को चढ़ाया जाने वाला विशेष प्रसाद ठेकुआ और अन्य पकवान बनाने में व्यस्त दिखे। मिट्टी के चूल्हों पर आम की लकड़ी की आंच से तैयार होने वाले इस प्रसाद की खुशबू से पटना की गलियां महक रही हैं। शुद्धता और नियम-निष्ठा का यह संगम ही छठ को महापर्व बनाता है।
गंगा घाटों और छतों पर उमड़ेगा जनसैलाब
प्रशासन और स्थानीय लोगों ने अर्घ्य की तैयारी पूरी कर ली है। आज शाम पटना के विभिन्न गंगा घाटों पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु जुटेंगे। हालांकि, सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए बड़ी संख्या में लोग अपने घरों की छतों पर या कृत्रिम तालाबों में भी भगवान सूर्य को अर्घ्य देने की तैयारी कर चुके हैं। सूप और दउरा में फल, फूल और नैवेद्य सजाकर व्रती कमर तक पानी में उतरकर सूर्य देव की आराधना करेंगे।
परिवारों का मिलन और अटूट आस्था
छठ केवल एक पूजा नहीं, बल्कि परिवारों को जोड़ने का सूत्र है। बरसों से यह परंपरा चली आ रही है कि जो लोग रोजी-रोटी के लिए प्रदेश से दूर रहते हैं, वे इस महापर्व पर अपने घर जरूर लौटते हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि अपनों के बीच आकर पूजा करने से जो मानसिक शांति और खुशी मिलती है, वह शब्दों में बयां नहीं की जा सकती।
कल होगा महापर्व का समापन
चार दिवसीय इस अनुष्ठान का समापन कल, यानी 25 मार्च को होगा। कल अहले सुबह व्रती और श्रद्धालु एक बार फिर घाटों पर जुटेंगे और उदीयमान (उगते हुए) सूर्य को अर्घ्य देंगे। इसी के साथ 36 घंटे का कठिन निर्जला उपवास समाप्त होगा और पारण के साथ महापर्व का विधिवत समापन होगा।
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