पटना। राजधानी में आज एक ऐतिहासिक शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार टनल बोरिंग मशीन (TBM) का बटन दबाकर उस अंडरग्राउंड सुरंग की खुदाई का आगाज करेंगे, जो बिहार म्यूजियम और पटना म्यूजियम को आपस में जोड़ेगी।
सिंगापुर से आई मशीन करेगी खुदाई
इस टनल के निर्माण की जिम्मेदारी दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) को सौंपी गई है। खुदाई के लिए विशेष रूप से सिंगापुर से अत्याधुनिक TBM मंगाई गई है। लगभग 1.5 किलोमीटर लंबी यह सुरंग 542 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होगी। यह भारत का पहला ऐसा प्रोजेक्ट है, जो दो बड़े संग्रहालयों को जमीन के नीचे से कनेक्ट करेगा।
सुविधाएं और भव्यता
यह टनल सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता कला केंद्र होगी।
आर्ट गैलरी: सुरंग की दीवारों पर मधुबनी पेंटिंग्स, भित्तिचित्र और बिहार की समृद्ध संस्कृति को प्रदर्शित किया जाएगा।
आवागमन: टनल पूरी तरह वातानुकूलित (AC) होगी। इसमें पैदल चलने के अलावा बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए बैटरी चालित गोल्फ कार की सुविधा भी मिलेगी।
प्रवेश द्वार: दोनों छोरों पर लिफ्ट और सीढ़ियों के साथ तीन-स्तरीय बेसमेंट वाली भव्य इमारतें होंगी।
मेट्रो के ऊपर से गुजरेगा रास्ता
तकनीकी रूप से यह प्रोजेक्ट काफी चुनौतीपूर्ण है। म्यूजियम टनल जमीन से 15-20 मीटर नीचे होगी, जबकि इसी के नीचे से पटना मेट्रो की लाइन गुजरेगी। नेहरू पथ के पास क्रॉसिंग पॉइंट पर मेट्रो टनल करीब 29 मीटर की गहराई पर होगी, जिससे दोनों टनल के बीच लगभग 6.5 मीटर की सुरक्षित दूरी बनी रहेगी।
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