पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के महज दो महीने बाद ही राज्य की राजनीति में एक बार फिर सियासी उथल-पुथल तेज हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष—दोनों खेमों में चल रही अंदरूनी खींचतान ने राजनीतिक तापमान को अचानक बढ़ा दिया है। मौजूदा हालात इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में विधानसभा का सियासी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
कांग्रेस विधायकों पर संकट के बादल
सबसे बड़ी हलचल कांग्रेस खेमे में देखी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बिहार कांग्रेस के सभी छह विधायक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू के संपर्क में बताए जा रहे हैं। यदि ये विधायक पाला बदलते हैं, तो 243 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस का प्रतिनिधित्व शून्य हो जाएगा। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधायक संगठनात्मक उपेक्षा और आंतरिक असंतोष से नाराज हैं। हाल ही में पटना के सदाकत आश्रम में आयोजित दही-चूड़ा भोज और संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी अनुपस्थिति ने अटकलों को और बल दिया है। हालांकि कांग्रेस नेतृत्व इन दावों को सिरे से खारिज कर रहा है।
NDA के भीतर नंबर गेम
सियासी हलचल सिर्फ विपक्ष तक सीमित नहीं है। एनडीए के भीतर भी भाजपा और जदयू के बीच वर्चस्व की होड़ साफ नजर आ रही है। भाजपा जहां अपनी मौजूदा संख्या 89 से आगे बढ़ना चाहती है, वहीं 85 सीटों वाली जदयू कांग्रेस विधायकों को जोड़कर गठबंधन में सबसे बड़ा दल बनने की रणनीति पर काम कर रही है।
RLM में बगावत के सुर
उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) में भी टूट के संकेत हैं। पार्टी के चार में से तीन विधायक भाजपा के संपर्क में बताए जा रहे हैं। पार्टी के भीतर असंतोष की मुख्य वजह उपेंद्र कुशवाहा द्वारा अपने बेटे को कैबिनेट में शामिल करना मानी जा रही है।
RCP सिंह की संभावित घर वापसी
बिहार की राजनीति में एक और चर्चित घटनाक्रम पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह की जदयू में संभावित वापसी को लेकर है। हाल ही में एक कुर्मी सम्मेलन में नीतीश कुमार के साथ उनकी मौजूदगी ने सियासी अटकलों को और तेज कर दिया है।
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