भागलपुर। जिले में आयोजित समृद्धि यात्रा के चौथे चरण की शुरुआत के दौरान एक दिलचस्प वाकया सामने आया। मंच संचालन कर रही एंकर ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ‘मुख्यमंत्री’ कहकर संबोधित कर दिया। यह घटना उस समय हुई जब नीतीश कुमार की मौजूदगी में सम्राट चौधरी को भाषण के लिए आमंत्रित किया जा रहा था।

​मंच से जब गूंजा ‘मुख्यमंत्री’ का नाम

​कार्यक्रम के दौरान पूर्व मंत्री विजय चौधरी के संबोधन के बाद सम्राट चौधरी की बारी थी। एंकर ने पहले उन्हें उपमुख्यमंत्री कहकर पुकारा, लेकिन जैसे ही सम्राट चौधरी अपनी कुर्सी से उठे, एंकर ने दोबारा माइक पर कहा, बिहार के मुख्यमंत्री जी का जोरदार तालियों के साथ स्वागत कीजिए। इस संबोधन पर सम्राट चौधरी ने सहज भाव से हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया और अपना भाषण शुरू किया। राजनीतिक गलियारों में इस ‘जुबान की फिसलन’ को भविष्य के संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है।

​क्यों अहम हैं सम्राट चौधरी?

​बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री की रेस में सबसे मजबूत चेहरा माना जा रहा है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं:
​लव-कुश समीकरण: नीतीश कुमार (कुर्मी) और सम्राट चौधरी (कोइरी) की जोड़ी को ‘लव-कुश’ कहा जाता है। राज्य की 7% आबादी वाले इस वोट बैंक में कोइरी समाज की हिस्सेदारी 4.21% है।
​OBC कार्ड: भाजपा गैर-यादव ओबीसी वोटों को साधने के लिए सम्राट चौधरी को आगे रख रही है।
​अनुभव का मेल: सम्राट चौधरी राबड़ी सरकार में सबसे युवा मंत्री रहने से लेकर विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष और अब दो बार डिप्टी सीएम रह चुके हैं। संगठन और सरकार दोनों पर उनकी पकड़ मजबूत है।

​नीतीश ने याद दिलाया ‘जंगलराज’

​यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 171 करोड़ रुपये की 88 योजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। जनता को संबोधित करते हुए उन्होंने 2005 से पहले की स्थिति का जिक्र किया। नीतीश ने कहा, “पहले लोग शाम को घर से निकलने में डरते थे और हिंदू-मुस्लिम झगड़े आम थे। हमने कानून का राज स्थापित किया है, जबकि पुरानी सरकार ने बिहार का बुरा हाल कर रखा था।”