कुंदन कुमार/पटना। बिहार में राज्यसभा चुनाव की पूर्व संध्या पर सियासी पारा चरम पर है। विधायकों की ‘घेराबंदी’ और बैठकों के दौर ने राजधानी पटना को राजनीतिक अखाड़े में तब्दील कर दिया है। जहां एक ओर सत्ताधारी NDA अपनी रणनीति को अंतिम रूप दे रहा है, वहीं महागठबंधन (RJD) अपने कुनबे को एकजुट रखने के लिए होटल ‘पनाश’ में डेरा जमाए हुए है।

​NDA की ‘मॉक पोल’ रणनीति

​जेडीयू नेता संजय झा के आवास पर रविवार सुबह NDA के शीर्ष नेताओं की बैठक हुई। इसमें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय पर्यवेक्षक विजय शर्मा भी शामिल हुए। चुनाव में तकनीकी चूक से बचने के लिए सम्राट चौधरी के आवास पर ‘मॉक पोल’ (अभ्यास मतदान) का आयोजन किया गया है। चूंकि एनडीए के लगभग 100 विधायक पहली बार राज्यसभा के लिए वोट करेंगे, इसलिए उन्हें वरीयता आधारित मतदान की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। शाम को मंत्री विजय चौधरी के आवास पर डिनर डिप्लोमेसी के जरिए अंतिम रणनीति तय होगी।

​महागठबंधन का ‘होटल पॉलिटिक्स’ और ओवैसी फैक्टर

​इधर, राजद ने अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए पटना के होटल पनाश में रुकने का निर्देश दिया है। राजद का आरोप है कि NDA धनबल के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रहा है। दिलचस्प मोड़ तब आया जब AIMIM के विधायक भी महागठबंधन की बैठक में नजर आए। शाम को AIMIM प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की दावत-ए-इफ्तार में तेजस्वी यादव की मौजूदगी ने नए समीकरणों को हवा दे दी है। ओवैसी की पार्टी का रुख इस चुनाव में ‘किंगमेकर’ साबित हो सकता है।

​जीत के दावे और शह-मात का खेल

​मंत्री श्रवण कुमार ने एनडीए की जीत का पूर्ण विश्वास जताते हुए कहा कि विपक्षी खेमे के दावे खोखले हैं। वहीं, तेजस्वी यादव की ओवैसी के विधायकों से बढ़ती नजदीकी ने एनडीए की चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल, दोनों खेमे एक-एक वोट बचाने और सेंधमारी रोकने के लिए पूरी ताकत झोंक चुके हैं।