पटना। बिहार की 5 राज्यसभा सीटों के लिए चुनावी बिसात बिछ चुकी है। कुल 6 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया है, जिनमें 5 NDA और 1 महागठबंधन (RJD) से हैं। इन उम्मीदवारों द्वारा दाखिल हलफनामों ने प्रदेश की राजनीति के कई दिलचस्प आर्थिक और कानूनी पहलुओं को उजागर किया है।
नीतीश कुमार: 20 साल मुख्यमंत्री, पर संपत्ति के नाम पर सिर्फ एक फ्लैट
करीब दो दशकों तक बिहार की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार की संपत्ति विवरण ने सबको चौंकाया है। उनके पास दिल्ली के द्वारका में 2004 में खरीदा गया एक फ्लैट है, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 1.48 करोड़ रुपये है। इसके अलावा उनके पास 2015 मॉडल की एक इकोस्पोर्ट कार है। मुख्यमंत्री के पास नकद मात्र 30,552 रुपये हैं और बैंक खातों में करीब 48,870 रुपये जमा हैं। विशेष बात यह है कि उनके नाम पर कोई भी कृषि या गैर-कृषि भूमि दर्ज नहीं है।
अमरेंद्र धारी सिंह: सबसे अमीर उम्मीदवार, ED-CBI के साये में
महाबंधन के इकलौते उम्मीदवार और RJD नेता अमरेंद्र धारी सिंह इस सूची में सबसे रईस हैं। उनकी कुल चल संपत्ति 206 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि अचल संपत्ति 36 करोड़ रुपये की है। हालांकि, वे कानूनी पचड़ों में भी घिरे हैं। उनके खिलाफ उर्वरक आयात घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के मामले ED और CBI द्वारा दर्ज किए गए हैं।
बीजेपी उम्मीदवार: किसी पर कर्ज, तो किसी को हथियारों का शौक
बीजेपी के राष्ट्रीय सचिव नितिन नवीन की आर्थिक स्थिति काफी संतुलित है। उनके पास 1.16 करोड़ की चल संपत्ति है, लेकिन उन पर 48.66 लाख रुपये का होम लोन भी चल रहा है। उन पर राजनीतिक प्रदर्शनों और आचार संहिता उल्लंघन से संबंधित 5 मामले भी दर्ज हैं।
वहीं, बीजेपी के दूसरे उम्मीदवार शिवेश राम को हथियारों का शौक है, उनके पास एक रिवॉल्वर और एक राइफल है। शिवेश के पास कुल 2.72 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति है।
रामनाथ ठाकुर और उपेंद्र कुशवाहा का लेखा-जोखा
जदयू के रामनाथ ठाकुर के पास 1.63 करोड़ की चल और 1.48 करोड़ की अचल संपत्ति है। साफ-सुथरी छवि वाले ठाकुर पर कोई क्रिमिनल केस नहीं है। उधर, उपेंद्र कुशवाहा के मामले में उनकी पत्नी स्नेहलता कुशवाहा उनसे अधिक धनवान हैं। उनकी पत्नी के पास 91 लाख की चल संपत्ति है, जबकि उपेंद्र के पास 44.94 लाख रुपये हैं। कुशवाहा पर पटना और मुजफ्फरपुर सहित विभिन्न जिलों में 7 मामले दर्ज हैं।
इस चुनाव में जहां नीतीश कुमार की सादगी एक राजनीतिक संदेश दे रही है, वहीं भारी-भरकम संपत्ति और मुकदमों वाले उम्मीदवार चुनावी चर्चा को गरमा रहे हैं।
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