पटना‌। बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने नगर विकास एवं आवास विभाग के 100 दिनों के कार्यकाल की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश करते हुए राज्य के शहरी ढांचे को बदलने के लिए कई बड़े फैसलों की घोषणा की है। सरकार का मुख्य फोकस स्वच्छता, पारदर्शिता और नियोजित शहरीकरण पर है।

​मीट दुकानों और अवैध पार्किंग पर नकेल

​राज्य में अब बिना लाइसेंस के मांस की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि धार्मिक स्थलों, स्कूलों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों के पास मीट की दुकानों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके साथ ही, शहरों में पार्किंग के नाम पर होने वाली अवैध वसूली को खत्म करने के लिए सभी पार्किंग स्थलों पर रेट चार्ट लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। अब जनता से तय शुल्क से अधिक पैसा नहीं लिया जा सकेगा।

​11 नए टाउनशिप और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर

​बिहार में व्यवस्थित शहरीकरण को बढ़ावा देने के लिए 11 नए टाउनशिप बनाने का निर्णय लिया गया है। ये सभी टाउनशिप प्लांड सिटी के रूप में विकसित किए जाएंगे, जहां ग्रीन सिटी कॉन्सेप्ट और आधुनिक सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा। साथ ही, अब भवन निर्माण के नक्शे पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से पास किए जाएंगे। बिहार के भौगोलिक परिवेश को देखते हुए बिल्डिंग बायलॉज में भी संशोधन किया जा रहा है।

​CAG ऑडिट से बढ़ेगी पारदर्शिता

​नगर निकायों में वित्तीय गड़बड़ियों को रोकने के लिए सरकार ने ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब नगर निकायों का ऑडिट चार्टर्ड अकाउंटेंट के बजाय सीधे CAG (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) द्वारा किया जाएगा। स्वच्छता अभियान और डस्टबिन खरीद में हुई अनियमितताओं की जांच के लिए प्रधान सचिव के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन भी किया गया है।

​डिजिटल गवर्नेंस और जन-सुविधाएं

​मानसून के दौरान जलजमाव और नाला जाम की शिकायतों के लिए विभाग ने व्हाट्सएप नंबर जारी करने का फैसला लिया है। खास बात यह है कि सभी कार्यपालक पदाधिकारियों को स्थायी मोबाइल नंबर दिए गए हैं, जो अधिकारी के तबादले के बाद भी नहीं बदलेंगे। पटना मेट्रो के कार्य में तेजी लाते हुए मलाही पकड़ी का काम लगभग पूरा कर लिया गया है और बिहार एवं पटना म्यूजियम के बीच सब-वे का निर्माण भी शुरू हो गया है।

​विज्ञापन और प्रशासनिक बदलाव

​अब केवल पंजीकृत एजेंसियां ही शहरों में होर्डिंग लगा सकेंगी, अन्यथा उन्हें अवैध मानकर हटाया जाएगा। वहीं, नगर निकायों की सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव अब नामांकन के बजाय पार्षदों के वोट से होगा, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था मजबूत होगी।