पटना। बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधायी कार्यों को गति देने हेतु 19 संसदीय समितियों का आधिकारिक गठन कर दिया गया है। विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) प्रेम कुमार की स्वीकृति के बाद जारी की गई इस सूची में राजनीतिक संतुलन और क्षेत्रीय समीकरणों का खास ख्याल रखा गया है। ये समितियां 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी और अगले एक वर्ष तक सरकार के कामकाज की निगरानी व समीक्षा करेंगी।
बाहुबली नेताओं की विधायी सक्रियता
इस बार समितियों के गठन में सबसे अधिक चर्चा बाहुबली छवि वाले नेताओं को मिली जगह की हो रही है। बाहुबली विधायक मनोरंजन सिंह उर्फ धूमल सिंह को पर्यटन उद्योग से जुड़ी महत्वपूर्ण समिति का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। वहीं, मोकामा के पूर्व विधायक और वर्तमान राजनीति के चर्चित चेहरे अनंत कुमार सिंह को पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति में बतौर सदस्य शामिल किया गया है। इन नियुक्तियों को सदन के भीतर अनुभवी लेकिन विवादास्पद चेहरों को मुख्यधारा के विधायी कार्यों से जोड़ने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
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बागी और तटस्थ विधायकों पर भरोसा
समितियों के चयन में उन विधायकों को भी तवज्जो दी गई है जिन्होंने हालिया राज्यसभा चुनाव के दौरान अपनी ही पार्टियों के रुख से अलग स्टैंड लिया था। राज्यसभा वोटिंग से दूरी बनाने वाले कांग्रेस विधायक मनोहर प्रसाद सिंह और आरजेडी विधायक फैसल रहमान को अलग-अलग समितियों का अध्यक्ष बनाकर पुरस्कृत किया गया है। राजनीतिक गलियारों में इसे भविष्य के नए गठजोड़ या असंतोष को थामने की कोशिश माना जा रहा है।
स्पीकर की अगुवाई में सुपर समितियां
विधानसभा की कार्यप्रणाली को दिशा देने वाली सबसे प्रभावशाली नियम समिति की कमान स्वयं स्पीकर प्रेम कुमार संभालेंगे। इस हाई-प्रोफाइल समिति में बिहार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ-साथ संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी को सदस्य बनाया गया है। यही टीम सामान्य प्रयोजन समिति का भी कार्यभार देखेगी, जो सदन के नीतिगत निर्णयों में निर्णायक भूमिका निभाती है।
कार्यकाल और जवाबदेही
नवनिर्मित समितियों का कार्यकाल 31 मार्च 2027 तक रहेगा। इन समितियों का मुख्य कार्य विभिन्न सरकारी विभागों के खर्चों, योजनाओं की प्रगति और प्रशासनिक पारदर्शिता की जांच करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के इन चर्चित चेहरों की मौजूदगी से इस बार समितियों की बैठकों में गहमागहमी बढ़ सकती है।
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