पटना। ​बिहार के मौसम में अचानक आए बदलाव ने राज्यवासियों को गर्मी से राहत तो दी है, लेकिन साथ ही चिंता भी बढ़ा दी है। प्री-मानसूनी चक्रवातीय गतिविधियों के सक्रिय होने से पूरे प्रदेश में आंधी, बारिश और वज्रपात का सिलसिला शुरू हो गया है। पटना मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, आने वाले चार दिन बिहार के लिए काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं।

​नालंदा में दिखा हवा का रौद्र रूप

​पिछले 24 घंटों में तेज हवाओं ने राज्य के कई हिस्सों में दस्तक दी। सबसे अधिक प्रभाव नालंदा में देखा गया, जहां हवा की रफ्तार 63 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई। इसके अलावा गया और नवादा समेत आसपास के जिलों में हल्की बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। आंकड़ों की बात करें तो गया के बेलागंज में सर्वाधिक 12.0 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई, जिससे पारा 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक नीचे गिर गया है।

​क्यों बदला मौसम? तीन प्रणालियों का असर

​मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस अस्थिरता के पीछे तीन प्रमुख भौगोलिक कारण हैं:

  • ​पहाड़ी सिस्टम: पहाड़ों की ओर से आ रही ठंडी हवाएं नमी लेकर आ रही हैं।
  • ​बंगाल की खाड़ी: यहां सक्रिय एक सिस्टम समुद्र से लगातार नमी बिहार की ओर धकेल रहा है।
  • ​ओडिशा का चक्रवात: ओडिशा के पास बने हवा के घुमाव ने पूरे क्षेत्र में मौसम को और अधिक अनिश्चित बना दिया है।

​8 और 9 अप्रैल को ऑरेंज अलर्ट जैसे हालात

​मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 8 और 9 अप्रैल को मौसमी गतिविधियां अपने चरम पर होंगी। इस दौरान कई जिलों में 50-60 किमी की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने और ओलावृष्टि की प्रबल संभावना है। 10 अप्रैल के बाद ही मौसम के धीरे-धीरे सामान्य होने के आसार हैं। प्रशासन ने किसानों और आम नागरिकों को वज्रपात के समय सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।