महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक विधानमंडल से पास हो गया है। मंगलवार को विधान परिषद ने भी अपनी मुहर लगा दी। इस बिल पर राज्यपाल के दस्तखत होने के बाद यह अमल में आ जाएगा। इसमें धर्म परिवर्तन रोकने के प्रावधान किए गए हैं। किसी को धर्म बदलने के लिए 60 दिन पहले नोटिस देनी पड़ेगी। CM फडणवीस ने कहा कि जो लोग अपनी मर्जी से धर्म बदलना चाहते हैं, उन्हें संविधान के आर्टिकल 25 के तहत पूरी आजादी है और इस कानून से उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.
महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक 2026 विधानपरिषद में पारित हो गया है. यह कानून बलपूर्वक, धोखे या विवाह द्वारा धर्मांतरण रोकने के लिए बताया जा रहा है. इस बिल का बचाव करते हुए CM फडणवीस ने कहा कि यह कानून सिर्फ गैरकानूनी धर्मांतरण रोकने के लिए है.
महाराष्ट्र विधानसभा के बाद मंगलवार रात विधानपरिषद में भी महाराष्ट्र धर्मांतरण विधेयक 2026 पास कर दिया गया है. यह विधेयक धर्मांतरण को रोकने के लिए लाया गया है. अब सिर्फ राज्यपाल के दस्तखत बाद ये कानून की शकल ले लेगा. कल विधानसभा में बिल पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जमकर बहस हुई, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का कहना है कि यह कानून धर्मनिरपेक्ष है और किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं है.
वहीं कांग्रेस और NCP जैसे विपक्षी दलों ने इस बिल की आलोचना करते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग हो सकता है. हालांकि, उद्धव ठाकरे की पार्टी शिवसेना (UBT) ने इस बिल का समर्थन किया है.
इस नए बिल में गैरकानूनी धर्मांतरण को साफ तौर पर परिभाषित किया गया है. किसी भी धर्मांतरण को अगर बलपूर्वक, धोखे से लालच देकर या शादी के जरिए कराया जाता है, तो वह गैरकानूनी माना जाएगा. इस बिल की सबसे अहम बात यह है कि इसमें ‘सबूत का भार’ आरोपी पर होगा. यानी अगर किसी पर धर्मांतरण कराने का आरोप लगता है, तो उसे ही यह साबित करना होगा कि यह धर्मांतरण स्वेच्छा से हुआ है, न कि किसी दबाव में.
आम धर्मांतरण पर 3 से 5 साल की जेल और 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. अगर यह मामला किसी महिला, नाबालिग या फिर अनुसूचित जाति और जनजाति से जुड़ा है, तो सजा 7 साल तक और जुर्माना 2 लाख रुपये तक बढ़ सकता है. अगर एक साथ कई लोगों का (Mass Conversion) धर्मांतरण कराया जाता है, तो सजा 10 साल तक और जुर्माना 5 लाख रुपये तक हो सकता है.
इसका मकसद जबरदस्ती धर्म परिवर्तन को रोकना है। विपक्ष हमसे पूछ रहा है कि क्या कोई डेटा है? तो हमें उन्हें बताना होगा कि जहां कानून ही नहीं है, वहां डेटा कहां से लाओगे। ओडिशा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, कर्नाटक और झारखंड सहित कई राज्यों ने पहले ही इसी तरह के कानून लागू कर दिए हैं। महाराष्ट्र में धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए आए ‘महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026’ में नाबालिगों, महिलाओं, या अनुसूचित जाति/जनजाति के सदस्यों के जबरन धर्मांतरण के मामलों में सजा अधिक सख्त है।
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