चंडीगढ़। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा मनरेगा को खत्म करने का फैसला दमनकारी तथा गरीबों के खिलाफ है जिसके विरुद्ध सबसे पहले पंजाब -ने आवाज उठाई है।
उन्होंने कहा कि देश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी स्कीम का नाम भगवान के नाम पर रखा गया है। देश का संविधान धर्म के नाम पर सरकारी काम करने की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि 23,000 करोड़ रुपए केंद्र सरकार की तरफ गरीब लोगों के लंबित पड़े हुए हैं।
उन्होंने कहा कि उपरोक्त राशि में से 12,219 करोड़ रुपए तो वेतन – से जुड़े हुए हैं जबकि 11,227 करोड़ रुपया मैटीरियल का लंबित पड़ा है। उन्होंने कहा कि मनरेगा को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है तथा देश भर के मजदूरों, दलितों व छोटे किसानों से रोजी-रोटी छीन ली गई है। केंद्र सरकार वास्तव में गरीबों को गुलाम बनाने जा रही है।

चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार ने इनके पेट पर हमला किया है और मजदूरों को मरने के लिए विवश कर दिया है। मजदूरों की आत्महत्याओं का आंकड़ा पहले ही बहुत बड़ा है क्योंकि वे भुखमरी का शिकार हो जाते हैं। कुछ लोग दवाई न मिलने के कारण मर जाते हैं।
चीमा ने कहा कि 2025-26 में केंद्र सरकार ने जो बजट बनाया था उसमें से 27 प्रतिशत बजट अनपेड है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को काम करने के दिन 100 से बढ़ाकर 150 करने की सिफारिश भेजी गई थी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था और राज्यों की आर्थिक स्थिति पर हमला बोला है।
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