नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की महिला सांसदों ने मंगलवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा है, जिसमें उनसे पिछले हफ्ते की कार्यवाही के दौरान सदन के अंदर कथित तौर पर “घिनौने काम” (heinous acts) करने वाले विपक्षी सांसदों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की अपील की.

भाजपा महिला सांसदों का पत्र कांग्रेस की महिला सांसदों के एक ग्रुप के लोकसभा स्पीकर को लिखे जाने के एक दिन बाद आया है, जिसमें उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उनके विरोध (4 फरवरी को) से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खतरा पैदा हुआ और कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर बहस के दौरान सदन से उनकी गैरमौजूदगी “डर का काम” थी.

सांसदों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान व्यवस्था और शिष्टाचार बनाए रखने के लिए ओम बिरला की तारीफ की. लेटर में कहा गया है, “हम 4 फरवरी, 2026 को माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान जिस शानदार तरीके से आपने लोकसभा की गरिमा, तमीज़ और पवित्रता को बनाए रखा और उसकी रक्षा की, उसके लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया और तारीफ़ करना चाहते हैं. उस दिन, पूरे सदन और असल में पूरे देश ने लोकसभा चैंबर के अंदर सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और अफसोसनाक घटनाओं में से एक देखी.” कथित गलत व्यवहार के बारे में बताते हुए BJP सांसदों ने दावा किया कि विपक्षी सांसदों ने पहले कभी नहीं हुए तरीके से कार्यवाही में रुकावट डाली.

पत्र में कहा गया है, “हमने विपक्षी पार्टी के सदस्यों को न केवल सदन के वेल में घुसते देखा, बल्कि स्पीकर की टेबल पर चढ़ते, कागज़ फाड़ते और स्पीकर की ओर फेंकते भी देखा.

इसके अलावा, दुख की बात है कि कुछ माननीय महिला सदस्य गुस्से में व्यवहार करते हुए और बैनर और प्लेकार्ड लेकर, बैनर और प्लेकार्ड पार करके दूसरी तरफ चली गईं. उन्होंने न केवल प्रधानमंत्री की सीट को घेर लिया, बल्कि ट्रेजरी बेंच पर भी घुस गईं, जहाँ सीनियर मंत्री बैठते हैं.”

यह विवाद पिछले हफ़्ते लोकसभा में हुई ऐसी रुकावटों के बाद हुआ है, जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बहस का तय जवाब नहीं दिया. 22 साल में यह पहली बार था जब कोई प्रधानमंत्री निचले सदन में बहस का जवाब नहीं दे सका. बाद में बार-बार रोक के बीच धन्यवाद प्रस्ताव को वॉयस वोट से पास कर दिया गया.

स्पीकर ने कहा था कि उन्हें “पक्की जानकारी” मिली है कि जब मोदी बोलने वाले थे, तो कुछ कांग्रेस सांसद प्रधानमंत्री की सीट तक पहुँच सकते हैं और “अचानक होने वाली घटनाएँ” कर सकते हैं. उन्होंने विपक्षी सदस्यों के बर्ताव की भी आलोचना की और कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को उस समय सदन में न आने की सलाह दी थी.

विपक्ष का विरोध इस मांग पर केंद्रित है कि राहुल गांधी को पूर्व आर्मी चीफ़ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड यादों और भारत-चीन संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बोलने की इजाज़त दी जाए. स्पीकर ने हाउस के नियमों का हवाला देते हुए किताब पर एक मीडिया आर्टिकल के रेफरेंस की इजाज़त नहीं दी थी, इस कदम का सीनियर मंत्रियों ने भी समर्थन किया था.

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