कस्तूरबा गांधी विद्यालय की छात्राओं का कमाल, महज 15 दिन के प्रशिक्षण में राष्ट्रीय कराते स्पर्धा में जीता स्वर्ण…

पुरुषोत्तम पात्र, गरियाबन्द. समर कैंप में 15 दिन की प्रैक्टिस ने कस्तूरबा गांधी विद्यालय में पढ़ने वाली बीपीएल परिवार की बेटियों को अंतरस्ट्रीय चैंपियन बना दिया. साल भर पहले कराटे के नेशनल गेम में गोल्ड लेकर आईं इन बेटियों ने इस बार भी गोल्ड मेडल पर मार ली बाजी. स्वर्णिम सफलता के बाद बुधवार को देवभोग पहुंचने पर लोगों ने फूलमालाओं से लाद आतिशबाजी कर जोरदार स्वागत किया.

3 जनवरी को मुम्बई के अंधेरी में सोतोवान संस्था की ओर से अंतरास्ट्रीय कराटे चैंपियन का आयोजन किया गया था. इसमें भारत के 11 राज्यो के खिलाड़ियों के अलावा श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, मलेशिया के 150 से ज्यादा खिलाड़ियों ने भाग लिया. यहां के कस्तूरबा आवासीय विद्यालय में 9वीं की छात्रा पद्म लता यदु ने 14 वर्ष के फाइट कैटेगरी में श्रीलंकाई खिलाड़ी को फाइनल राउंड में पछाड़ कर गोल्ड मैडल हासिल किया. 26 किग्रा कैटेगरी में 8वीं की छात्रा मिनाक्षी ने यूपी की प्रतिद्वन्दी को पछाड़ कर गोल्ड मैडल पर कब्जा किया. 24 किग्रा के कैटेगरी में 7वी में पढ़ने वाली अनिता मरकाम को ब्रॉन्ज मैडल हासिल किया.

इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहीं अभनपुर की बरखा राजपूत कराटे में ब्लैक बेल्ट हैं. उन्होंने पिछले साल गर्मियों की छुट्टी में संस्था में पढ़ने वाली 100 छात्राओं को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया था. उसी समय बरखा ने पद्मलता व मीनाक्षी की प्रतिभा को देखते हुए दिसम्बर 2018 में आयोजित नेशनल स्तर के प्रतियोगिता के लिए ले गई थी. पिछले बार एक गोल्ड व एक सिल्वर मैडल जीतकर आये थे. खिलाड़ियों के देवभोग पहुंचने पर लोगों ने जोरदार स्वागत किया. खिलाड़ियों के समर्थन में जोरदार नारेबाजी करते हुए लोग बस स्टैंड से जुलूस निकाल कर कस्तूरबा विद्यालय तक पहुंचे. इस दौरान सजंय नेताम के अगुवाई में कांग्रेसी भी आतिशबाजी कर ऐतिहासिक स्वागत किया.

साल में 15 दिन का प्रशिक्षण

संस्था की अक्षीक्षक अमिता मेढ़े ने बताया कि बच्चों को 15 दिन की सामूहिक ट्रेनिंग दी जाती है, चयनित खिलाड़ियों पर थोड़ा ज्यादा ध्यान दिया गया था. मेढ़े ने कहा कि उन्हें यकीन भी नही था कि बगैर तकनीकी प्रशिक्षण के अनरारस्ट्रीय स्तर पर बेटियों को ख्याति मिलेगी. वहीं कस्तूरबा में रहने वाली तीनो बेटियां बीपीएल परिवार से हैं मुम्बई जाने-आने के लिये एक खिलाड़ी के पीछे 7 से 8 हजार रुपए के खर्च आ रहा थे. संस्था के मद में भी ज्यादा रुपए नही थे. संस्था आधे खर्च वहन किया, जबकि जनपद अध्यक्ष नेहा सिंघल, जनपद सदस्य व अधिकारियों ने निजी सहयोग कर जरूरी खर्च को पूरा कर बेटियों को भेजा था.

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