पटना। बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं का धैर्य अब जवाब दे रहा है। BSSC द्वितीय इंटर स्तरीय भर्ती और CGL-4 की परीक्षा तिथियों में हो रही देरी को लेकर अभ्यर्थियों ने मोर्चा खोल दिया है। छात्र नेताओं का स्पष्ट कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो राज्यव्यापी बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
ढाई साल का इंतजार और मानसिक दबाव
अभ्यर्थियों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाया जा रहा है। विज्ञापन निकले लंबा समय बीत चुका है, लेकिन परीक्षा की तारीखों का अता-पता नहीं है। छात्रों का कहना है कि पिछली भर्तियों के कड़वे अनुभवों को देखते हुए उन्हें डर है कि यह प्रक्रिया भी सालों न खिंच जाए। लंबे इंतजार के कारण युवा न केवल आर्थिक बल्कि गहरे मानसिक दबाव का सामना कर रहे हैं।
25 अंक वेटेज पर गहराता विवाद
विरोध का सबसे मुख्य केंद्र संविदा कर्मियों को दिए जाने वाले 25 अंकों के अतिरिक्त वेटेज का फैसला है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि यदि अनुभव के आधार पर इतने अंक सीधे दे दिए जाएंगे, तो सामान्य और मेधावी छात्रों के लिए प्रतियोगिता में बने रहना नामुमकिन होगा। छात्र नेताओं ने सवाल उठाया कि जब UPSC और BPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो BSSC में यह विशेषाधिकार क्यों? इसे सीधे तौर पर पारदर्शिता के साथ खिलवाड़ बताया जा रहा है।
मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की गुहार
छात्रों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इस मामले में तुरंत दखल देने की मांग की है।
उनकी प्रमुख मांगें हैं:
परीक्षा की निश्चित तारीखों का तत्काल ऐलान हो।
25 अंक के अतिरिक्त वेटेज वाले फैसले को वापस लिया जाए।
भर्ती प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जाए।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यह उनकी भविष्य की लड़ाई है और मांगें पूरी होने तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
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