नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने शालीमार बाग गांव की मुख्य सड़क को चौड़ा करने के लिए बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने 143 मकानों को ध्वस्त करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें करीब 157 परिवार निवास कर रहे हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सड़क को 30 मीटर चौड़ा करने के लिए अवैध रूप से बने निर्माणों को हटाया जाए। अदालत की पीठ ने प्रभावित परिवारों को मकान खाली करने के लिए 30 मई तक का समय दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सार्वजनिक हित और यातायात सुगमता को ध्यान में रखते हुए सड़क चौड़ीकरण जरूरी है।
जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मधु जैन की पीठ ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों स्थानीय निवासियों और सरकारी विभागों को विस्तार से सुना। अदालत ने पाया कि मकान मालिक अपने निर्माण के समर्थन में वैध दस्तावेज पेश करने में असफल रहे। वहीं, दिल्ली विकास प्राधिकरण समेत अन्य विभागों ने अदालत में यह साबित किया कि ये सभी मकान सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि इन इमारतों को अवैध तरीके से पांच से छह मंजिल तक खड़ा किया गया है और इन्होंने लगभग 24 मीटर जमीन पर कब्जा कर रखा है। अदालत ने अपने आदेश में इलाके की बदहाल स्थिति पर भी चिंता जताई। कोर्ट के अनुसार, सड़क इतनी संकरी हो चुकी है कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और स्कूल बस जैसी जरूरी सेवाओं के वाहन भी आसानी से नहीं निकल पाते, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हालात सुधारने और दिल्ली मास्टर प्लान-2021 के अनुपालन के लिए इस सड़क को 30 मीटर तक चौड़ा करना अनिवार्य है। इसी के मद्देनजर अवैध निर्माणों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं।
पीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह अवैध निर्माण मैक्स रोड, शालीमार बाग गांव (हैदरपुर गांव) की सड़क संख्या-320 पर किया गया है। यह मार्ग रिंग रोड (मुकरबा चौक) से जुड़ता है और यातायात की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कोर्ट ने बताया कि संबंधित क्षेत्र के जिला अधिकारी द्वारा किए गए सर्वेक्षण में 670 मीटर लंबे हिस्से में 143 मकानों की पहचान की गई है, जिनमें 157 परिवार रहते हैं। इन मकानों में कुल करीब 750 लोग निवास करते हैं। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि मकान मालिक वैध दस्तावेज पेश करने में असफल रहे, जबकि दिल्ली विकास प्राधिकरण समेत अन्य विभागों ने यह साबित किया कि ये निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध रूप से किए गए हैं। कई इमारतें पांच से छह मंजिल तक बनी हुई हैं और इन्होंने लगभग 24 मीटर जमीन पर कब्जा कर रखा है।
1980 में अधिग्रहित कर ली गई थी जमीन
अदालत में सुनवाई के दौरान स्थानीय निवासियों ने सरकार द्वारा जारी मकान खाली करने के नोटिस को चुनौती दी थी। कोर्ट ने मकान मालिकों से स्वामित्व के वैध दस्तावेज पेश करने को कहा, लेकिन कोई भी ठोस कागजात प्रस्तुत नहीं किए जा सके। वहीं, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने अदालत को बताया कि यह जमीन वर्ष 1980 में ही अधिग्रहित कर ली गई थी। इसके बाद विभिन्न मास्टर प्लान के तहत इस क्षेत्र को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाना था, लेकिन लोगों ने न केवल सड़क किनारे बल्कि उससे लगे नाले तक पर अवैध निर्माण कर लिया।
‘केवल 10 मीटर से कब्जा हटवा रहे’
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अधिवक्ता धीरज सिंह ने अदालत को बताया कि प्रशासन ने इस मामले में लचीला रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में केवल लगभग साढ़े 10 मीटर क्षेत्र से अवैध कब्जा हटाकर सड़क को निर्धारित मानकों के अनुसार 30 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता में करीब 24 मीटर जमीन पर अवैध कब्जा है। यदि पूरा कब्जा हटाया जाता, तो हजारों परिवार प्रभावित होकर बेघर हो सकते थे।
इलाके में प्रस्तावित बड़े प्रोजेक्ट
सड़क चौड़ीकरण के साथ ही इस क्षेत्र में कई बड़े विकास कार्य प्रस्तावित हैं.मिनी सचिवालय का निर्माण, जिसका काम जल्द शुरू होने की संभावना दो शॉपिंग मॉल के लिए जमीन चिन्हित, नक्शा स्वीकृत “शालीमार प्लेस” का विकास, जिसे भारत मंडपम की तर्ज पर तैयार किया जाएगा, जहां बड़े कार्यक्रम आयोजित होंगे अधिकारियों का मानना है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र का तेजी से विकास होगा और बुनियादी ढांचा मजबूत होगा।
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