सीएम सचिवालय से लेकर राज्य सरकार के 30 से अधिक विभाग सहित बीएसपी और रेल्वे में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी, 580 प्रकरणों में 245 मिले फर्जी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी करने का सिलसिला वर्षों से चल रहा है. छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े अधिकारी तक भी फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के मामले में फंसे हैं. फिर चाहे वह पद डिप्टी कलेक्टर का हो, या डिप्टी एसपी का, शिक्षक का हो या वाणिज्यकर अधिकारी का. फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिए प्रदेश में नौकरी करने वालों की संख्या सैकड़ों में है. राज्य शासन में ऐसा एक भी विभाग नहीं जहाँ फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले लोग नहीं मिले. सरकार के पास जब 580 शिकायतें आई और जब इस पर जाँच शुरू हुआ तो एक से बढ़कर एक खुलासे होते चले गए. सरकार ने अब तक जो जाँच कराई है उसमें 245 लोग फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिए नौकरी करने वाले मिले हैं. इन में बहुत से लोगों को बाहर कर दिया गया है, तो कुछ स्टे के सहारे अभी टिके हुए हैं. वहीं 115 प्रकरण विचाराधीन है. 

lalluram.com के पास मौजूद इन दस्तावेजों को देखेंगे तो आप हैरान रह जाएंगे करीब-करीब हर एक सरकारी विभाग में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के सहारे नौकरी पाने वाले लोग मिले हैं. यही नहीं बीएसपी और रेल्वे में ऐसे लोगों की कमी नहीं. सबसे हैरानी की बात ये कि सीएम सचिवालय तक एक फर्जी प्रमाण-पत्र वाले की पहुँच हो गई थी. शिक्षा विभाग में सर्वाधिक 29 प्रकरण मिले हैं. वहीं सामान्य प्रशासन विभाग में 12, उद्योग विभाग में 12, भिलाई स्टील प्लांट में 12 प्रकरण हैं. अन्य विभागों की जानकारी उपर्युक्त दस्तावेज हैं. इसके साथ ही 16 प्रकरण जनप्रतनिधियों के भी हैं. 

सवाल ये हैं कि आखिरी फर्जी प्रमाण-पत्र के जरिए यह उच्छ पदों तक, विभागों तक पहुँच कैसे जाते हैं ? क्या इस खेल में सिस्टम के लोग मिले होते हैं ? क्योंकि नौकरी हो या जनप्रतनिधि का चुनाव हर जगह पूरी तरह से दस्तावेजों छानबीन होना जरूरी है. वैसे भूपेश सरकार ने 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर यह ऐलान तो कर ही दिया है, कि छत्तीसगढ़ में फर्जी तरीके से नौकरी करने वाले हो या नेता गिरी उन सबकों बाहर कर दिया जाएगा. इसके लिए सरकार जाति प्रमाण-पत्र उच्च स्तरीय छानबीन समिति को एक महीने का समय दिया है. देखिए सीएम के निर्देशों पर कितना अमल हो पाता है ? 

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