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संजीव शर्मा, कोंडागांव। बस्तर अपने आप में अनोखा. यहां की संस्कृति देश ही नहीं दुनिया में अपना छाप छोड़ चुकी है. ऐसे में चाहे काजू की खेती, यहां की संस्कृति की रंग या लजीज स्वाद के चटखारे हो. बस्तर के हर कोई दीवाने हैं. इसी तरह बस्तर में एक ऐसी सीजनल सब्जी है, जो हजारों लोगों को अपने लजीज स्वाद से कायल कर दी है. इस सब्जी की कीमत चिकन से भी ज्यादा है, जिसकी अच्छी खासी डिमांड है.
दरअसल, बारिश शुरू होते ही बोडा ने एन्ट्री मार दी है. बोडा इन दिनों तकरीबन 1500 रुपये प्रति किलो की कीमत में बिक रहा है. बोडा में औषधीय गुण हैं. हार्ट और ब्लड प्रेसर की दवाइयों के लिए उपयोग किया जाता है. बोडा को मशरूम माना गया है. यह आलू की तरह जमीन के अन्दर पैदा होता है. इसमें ज्यादा मात्रा में मिटटी चिपकी रहती है, इसलिए इसे पकाने के पहले कई बार गर्म पानी से साफ करना होता है.
बोडा की बढ़ी कीमत
दरअसल, बोडा बस्तर की एक ऐसी सीजनल सब्जी है, जिसका लोग सालभर इंतजार करते हैं. स्वाद में ऐसी लाजवाब कि इस सब्जी के दाम कितने भी ज्यादा हों, लोग इसे खरीद ही लेते हैं. बारिश के मौसम के प्रारम्भिक दिनों में ये सब्जी साल जंगलों में उत्पन्न होता है. साल वृक्ष के नीचे की नम मिटटी में यह जमीन को फाड़कर निकलता है.
छोटे-बडे सभी बाजारों में उपलब्ध
बोडा खोजने के लिए गांव वाले जंगलों में जाते हैं. जानकार ग्रामीण महिला-पुरूष जमीन देखकर यह पहचान जाते हैं कि जमीन के नीचे बोडा है या नहीं. ये मशरूम इन दिनों छोटे-बडे सभी बाजारों में दिखने लगा है. आमतौर पर इसे अभी 300 से 400 रुपये प्रति सोली की दर पर बेचा जा रहा है.
मशरूम प्रजाति का माना जाता है बोडा
वैज्ञानिक रूप से इसे मशरूम प्रजाति में शामिल किया गया है. अभी तक इसे मशरूम की तरह कृत्रिम रूप से उगाया नहीं जा सका है. यही कारण है कि यह शतप्रतिशत प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाली जैविक सब्जी है. यह भी एक कारण है कि इसे मानचाही कीमतों पर बेचा और खरीदा जाता है. शुरूआत में इसकी कीमत तकरीबन परम्परागत सभी सब्जियों से ज्यादा होती है. हजार डेढ़ हजार से दो हजार रुपये प्रति किलो या पायली तक बेचा जाता है. बाद में यह रेट 200 रूपये से 400 रूपये तक गिर जाता है.
मिक्स बनाकर भी चखें स्वाद
मंहगा होने के कारण कई परिवारों में इसे अन्य सब्जियों के साथ मिक्स करके भी बनाया जाता है. शाकाहारी परिवारों में इसे आलू, ग्वाल फली, और अन्य हरी सब्जियों के साथ मिक्स करते बनाते हैं, जबकि नाॅनवेज के शौकीन इसे चिकन-मटन के साथ बना कर इसके स्वाद का आनंद उठाते हैं. सिर्फ बोडा की सब्जी तरकारी का जायका ही अलग है.
कीमती और ज्यादा स्वादिष्ट
बोडा के शौकीन बताते हैं कि प्रारम्भिक दिनों में मिलने वाला बोडा जाता बोडा कहलाता है. इसी की कीमतें ज्यादा होती है. स्वाद भी इसी में ज्यादा है. स्वाद तो अच्छा होता है, लेकिन उसमें फायबर की मात्रा इतनी ज्यादा हो जाती है कि उसे चबाने में मशक्कत करनी पडती है. हालांकि बोडा का सीजन लगभग 50 से 60 दिन का होता है, लेकिन शुरूवात के बीस तीस दिन ही महत्वपूर्ण माने जाते हैं.
बन रही है हार्ट और ब्लड प्रेसर की दवाइयां
बोडा पर कई रिसर्च चल रहे हैं. बोडा में बेहतरीन क्वालिटी की प्रोटीन, विटामिन्स और मिनरल्स होते हैं. जो हार्ट और ब्लड प्रेसर के मरीजों को आराम दिलाता है. इससे हार्ट और ब्लड प्रेसर की दवाइयां बनाई जा रही है.
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