अमित पांडेय, डोंगरगढ़। ग्राम पारागांव खुर्द में जमीन के सीमांकन में हुई गड़बड़ी ने दो परिवारों के बीच गंभीर विवाद खड़ा कर दिया है। राजस्व विभाग की लापरवाही के कारण शुरू हुआ यह मामला अब इतना बढ़ चुका है कि गांव में कभी भी बड़े संघर्ष की आशंका जताई जा रही है। लिखन लाल लोधी और रामकुमार लोधी के बीच जमीन को लेकर चल रहा विवाद आए दिन गाली-गलौज और झगड़े में बदल रहा है, जिससे पूरे गांव का माहौल तनावपूर्ण हो गया है।

बताया जा रहा है कि लिखन लाल लोधी ने वर्ष 2008 में करीब 1.42 एकड़ जमीन खरीदी थी और तब से उस पर कब्जे में है। उसी समय रामकुमार लोधी ने भी पास की जमीन खरीदी थी। विवाद तब शुरू हुआ जब खसरा नंबर 217/3 और 217/5 के सीमांकन और नक्शों में अंतर सामने आया। आरोप है कि राजस्व अमले द्वारा नक्शे में की गई काट-छांट के कारण जमीन की स्थिति बदल गई, जिससे दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

लिखन लाल का कहना है कि वे वर्षों से न्याय के लिए तहसील से लेकर आयुक्त और राजस्व मंडल तक भटक रहे हैं और कई जगह से उनके पक्ष में आदेश भी मिले हैं। इसके बावजूद उन्हें जमीन पर न्याय नहीं मिल पाया। अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) डोंगरगढ़ ने भी अपने आदेश में विवादित जमीन पर लिखन लाल का कब्जा माना और दूसरे पक्ष को हस्तक्षेप से रोका था। साथ ही फसल लौटाने के निर्देश दिए थे, लेकिन इन आदेशों का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं दिख रहा। आरोप है कि हर साल उनकी फसल जबरन काट ली जाती है और विरोध करने पर धमकी दी जाती है।

सवालों के घेरे में प्रशासन की निष्क्रियता

मामला जब उच्च स्तर पर पहुंचा तो आयुक्त दुर्ग संभाग और राजस्व मंडल ने भी माना कि निचले स्तर पर गलती हुई है। नियमों के अनुसार नक्शा सुधार का अधिकार केवल कलेक्टर को है, लेकिन तहसील स्तर पर ही इसमें बदलाव कर दिया गया, जिसे बाद में अमान्य घोषित करना पड़ा। इससे साफ है कि शुरुआत में ही प्रशासनिक लापरवाही हुई, जिसका खामियाजा अब दोनों परिवार भुगत रहे हैं। इस पूरे मामले में प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। न्यायालय के स्पष्ट आदेशों के बावजूद यदि उनका पालन नहीं हो पा रहा तो यह व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है। गांव के लोग भी मानते हैं कि समय रहते कार्रवाई होती तो मामला इतना नहीं बढ़ता।

मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन

वहीं इस मामले में पटवारी लिकेश साहू का कहना है कि विवाद की मुख्य वजह अलग-अलग रिकॉर्ड में अंतर है। मैनुअल, ऑनलाइन और आरटीआई से मिले नक्शों में भिन्नता के कारण स्थिति उलझ गई है। उनका कहना है कि मौके पर जमीन रिकॉर्ड के अनुसार नहीं मिल रही, जिससे सीमांकन में दिक्कत आ रही है। फिलहाल मामला एसडीएम न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम निर्णय वहीं से लिया जाएगा। पटवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके स्तर पर केवल प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है, जबकि विवाद का निराकरण करना उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। लगातार हो रही अनदेखी से परेशान लिखन लाल ने अब आंदोलन की चेतावनी दी है। ऐसे में अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह विवाद किसी भी समय बड़े संघर्ष में बदल सकता है।