बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सरकारी कुक्कुट पालन परिक्षेत्र में पिछले 5 दिनों में 5000 से अधिक मुर्गा– मुर्गियों की मौत हो गई है। शासकीय पोल्ट्री फार्म में हुए इस घटना से पशु चिकित्सा विभाग समेत आसपास के क्षेत्रों में भी हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक तौर पर बर्ड फ्लू की आशंका जताई जा रही है। मौत के कारणों को जानने के लिए सैंपल भोपाल स्थित लैब भेजे गए हैं। सैंपल रिपोर्ट आने के बाद ही घटना के कारणों की पुष्टि हो सकेगी। तब तक के लिए शासकीय पोल्ट्री फार्म को बंद कर दिया गया है।
बिलासपुर जिले के कोनी में कुक्कुट पालन परिक्षेत्र में शासकीय पोल्ट्री फार्म स्थित है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को मुर्गा–मुर्गी पालन के लिए सरकार द्वारा चूजे उपलब्ध करवाए जाने की योजना के तहत कोनी में शासकीय पोल्ट्री फार्म स्थापित किया गया है। यहां से अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के लोगों को मुर्गा और मुर्गी पालन के लिए चूजे उपलब्ध करवाए जाते हैं। इस कुक्कुट पालन परिक्षेत्र में करीबन विभिन्न नस्लों के 6 हजार से अधिक मुर्गा– मुर्गियों का पालन किया जाता है और प्रजनन करवाया जाता है।


18 मार्च से मरने लगे मुर्गे–मुर्गी
शासकीय कुक्कुट पालन परिक्षेत्र में शेड बनाकर अलग–अलग प्रजातियों के मुर्गा– मुर्गियों को रखा जाता है। बीते 18 मार्च से अचानक शेड में रहने वाले मुर्गे– मुर्गियां मरने लगी। धीरे–धीरे यह आंकड़े बढ़ने लगे और रोजाना मुर्गे–मुर्गियों की मौत होने लगी। शुरुआत में पोल्ट्री प्रबंधन ने अपने स्तर पर इससे निजात पाने की कोशिश की पर मामला काबू में नहीं आने पर पोल्ट्री फार्म प्रबंधक संजय राज ने संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा जीएसएस तंवर को इसकी जानकारी दी।
रायपुर की टीम ने किया निरीक्षण
कलेक्टर संजय अग्रवाल को भी मामले की जानकारी दी गई । पांच हजार से अधिक मुर्गे–मुर्गियों की मौत से पशु चिकित्सा विभाग समेत क्षेत्र में भी हड़कंप मच गया। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इसकी जानकारी राज्य पशु चिकित्सा विभाग को भेजी, जिसके बाद आज पशु चिकित्सा विभाग के रायपुर की टीम ने बिलासपुर आकर कुक्कुट पालन परिक्षेत्र का दौरा किया और वस्तु स्थिति का अवलोकन कर कारणों को जानने की कोशिश की।
5 किलोमीटर का दायरा संवेदनशील घोषित
माना जा रहा है कि पोल्ट्री फार्म प्रबंधक संजय राज ने इस मामले में लापरवाही बरती है। 18 मार्च से मुर्गे– मुर्गियों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया था। यदि वे पहले इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दे देते तो हो सकता है कि मौत का सिलसिला थम जाता और मौत के कारणों का भी पता चल जाता। अब मौत के कारणों को जानने के लिए भोपाल स्थित लैब में सैंपल भेजा गया है। सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही घटना की स्पष्ट कारणों का खुलासा होगा। यदि बर्ड फ्लू की पुष्टि हो जाती है तो कुक्कुट पालन परिक्षेत्र के 5 किलोमीटर का दायरा संवेदनशील घोषित कर दिया जाएगा और इस परिधि में आने वाले सभी मुर्गा–मुर्गियों को मारना पड़ेगा ताकि बर्ड फ्लू न फैले।

