जन सुनवाई: प्लेसमेंट एजेंसी के खिलाफ 70 महिला सफाईकर्मियों ने की थी शिकायत, अगली सुनवाई में कर्मचारी अपने मालिक के साथ होंगे उपस्थित

सुप्रिया पांडेय, रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने शास्त्री चौक रायपुर स्थित आयोग कार्यालय में महिलाओं से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई हुई. जन सुनवाई आयोग के अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक ने नव नियुक्त सदस्यगण नीता विश्कर्मा, अर्चना उपाध्याय, शशिकांता राठौर के साथ की. सुनवाई के एक प्रकरण में 70 महिला सफाईकर्मी ने सुपरवाइजर द्वारा अभद्र व्यवहार करने की शिकायत की थी. इस पर आगामी सुनवाई में सभी अनावेदकगण को थाना प्रभारी के माध्यम से उपस्थित करने कहा गया.

अपीलकर्ता प्लेसमेंट एजेंसी जो कि छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग में पिछले 5 वर्षों से कार्यरत है. अपीलकर्ताओं से पूछने पर प्लेसमेंट एजेंसी वर्कऑर्डर को लेकर नहीं आए हैं. आगामी सुनवाई में आवश्यक रूप से पुराने के साथ नए संसोधित दस्तावेजों को लाने के निर्देश अध्यक्ष ने दिए. इस स्तर पर आवेदिकागणों ने निवेदन किया कि उनके द्वारा अप्रैल महीने में प्रस्तुत आवेदन में सुपरवाइजर का नाम उल्लेखित था, जिसे दूसरे जगह स्थानांतरित कर दिया गया. उसके जगह दूसरे को सुपरवाइजर बनाया गया है.

सुपरवाइजर के माध्यम से सभी सफाईकर्मी महिलाओं के साथ अश्लील गाली गलौज और दुर्व्यवहार किया जाता है. अध्यक्ष डॉ नायक ने समझाइश दी कि जब तक इस प्रकरण का निराकरण नहीं हो जाता, तब तक आवेदिकागणों के साथ दुर्व्यवहार न करें. साथ ही अगर अनावेदकगण के द्वारा किसी भी प्रकार से दुर्व्यवहार किया जाता है तो आवेदिकागण लिखित शिकायत करें.

केस नंबर- 2

एक अन्य प्रकरण में आवेदिका ने एम्स में कार्यरत अपने पति पर आरोप लगाया कि वह शराब, गांजा पीकर उनके साथ अश्लील गाली गलौज करते हैं. पति रेप की कोशिश के साथ-साथ अश्लील वीडियो बनाने की भी कोशिश करते हैं. उन्होंने बताया कि महज 2 महीने पहले ही उनकी शादी हुई है.

इस विवाह में अनावेदक के परिवार से कोई शामिल नहीं हुआ था. आज तक उसने स्वयं भी अपने ससुराल पक्ष के लोगों से नहीं मिली है. विवाह का सारा खर्च आवेदिका द्वारा व्यय किया गया है. इसके साथ ही उन्होंने अध्यक्ष को अवगत कराया कि वर्तमान में मेकाहारा में इन्टरशिप कर रहे उनके साथी, पति की सभी गलती को छुपाते और उसे सहयोग करते हैं. इससे उनकी शादीशुदा जिंदगी को खराब हो रही हैं. पति और उनके दोस्त द्वारा अन्य लड़कियों को घर पर भी लाया जाता है.

इस प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष डॉ नायक ने कहा कि नशा कर पत्नि के साथ अश्लील हरकत करना मानसिक असंतुलन है. पति को ऐसी हरकतों को बंद करने की हिदायत देते हुए समस्त दस्तावेजों के साथ उनकी मां और भैया-भाभी और उनके दोस्त को उनकी विश्रामपुर(अम्बिकापुर) में पदस्थ पत्नी के साथ आयोग की सदस्य नीता विश्वकर्मा के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए.

केस नंबर-3

एक अन्य प्रकरण में स्वयं के घर से अपने ही बेटे के द्वारा निकाले जाने की शिकायत पर अध्यक्ष ने आवेदिका को संबंधित तिल्दा के थाना में प्राथमिकी दर्ज कराने कहा. उन्होंने कहा कि आवेदिका और उसकी बहन की संयुक्त स्वामित्व की संपत्ति खेत और मकान से बाहर करना घरेलू हिंसा जैसी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है. इसी तरह आयोग के समक्ष धोखाधड़ी का प्रकरण प्रस्तुत हुआ. इसमें आवेदिका ने बताया कि उसने निजी जमीन को बेचने से मिली 9 लाख रुपए की राशि को बैंक में जमा कराई थी.

मेरे पति जन्म से ही नेत्रहीन है. अनावेदक द्वारा इस राशि को उधार के रूप में लेकर प्रतिमाह ब्याज देने की बात कही गई. उन लोगों द्वारा कुछ समय तक तो ब्याज के रूप में कुछ राशि दिया गया. उसके बाद देना बंद कर दिए और न ही उनके द्वारा मूल राशि 9 लाख रुपए को वापस दिया जा रहा है. प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए अध्यक्ष ने अनावेदक को प्रकरण से संबंधित अन्य लोगों को साथ लेकर 31 जुलाई को उपस्थित होने कहा. इसके साथ ही थाना प्रभारी के माध्यम से अन्य संबंधितों को उपस्थित कराने संबंधी पत्र जारी करने कहा.

केस नंबर-4

लैंगिक उत्पीड़न के प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित आवेदिका शासकीय स्कूल में शिक्षिका है. उन्होंने ब्लॉक अधिकारी के खिलाफ लैंगिक उत्पीड़न, अमर्यादित शब्दों का शिकायत आयोग में किया है. उभय पक्षों को सुना गया, जिसमें आवेदिका द्वारा बताया गया कि हाई स्कूल में भर्ती के लिए गरीब बच्चों से वसूली किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने किया था. इससे आक्रोशित होकर अनावेदक ने मुझे जानबूझकर टारगेट कर पूरे स्टाफ के सामने अमर्यादित व्यवहार और लैंगिक उत्पीड़न किया.

इस स्तर पर अनावेदक ने यह स्वीकार किया कि वह भर्ती में वसूली की जांच के लिए गया था, जिसको मैने सही पाया और उसकी रिपोर्ट जमा किया.उसी दौरान मैंने आवेदिका के स्कूल रिकॉर्ड को देखा, जिसमें 2 दिन स्कूल की हाजरी पंजीयन में हस्ताक्षर नहीं किया था. इसलिए आवेदिका को सीएल का आवेदन लिखावाया था. आवेदिका का कथन है कि उसने वहां पर ऑनलाइन क्लास पर सभी कार्य कर रही थी. काम की अधिकता के कारण हस्ताक्षर करने भूल गई थी, लेकिन उस बात को अनावेदक मानने को तैयार नहीं था. पूरे स्टाफ के सामने दुर्व्यवहार किया. इस स्तर पर उभय पक्ष को निर्देशित किया गया है कि अपना पक्ष रखने के लिए जो भी सम्बंधित दस्तावेज हैं. उसे आयोग के अगली सुनवाई में प्रस्तुत करें, जिससे प्रकरण का निराकरण किया जा सके.

केस नंबर-5

एक प्रकरण में उभय पक्ष उपस्थित पिछली सुनवाई में स्थानीय परिवाद समिति से जांच रिपोर्ट मंगाए जाने के लिए समय दिया गया था. आज सुनवाई में जांच रिपोर्ट लिखकर जिला कार्यक्रम अधिकारी, संरक्षण अधिकारी, उपस्थित हुए उनके द्वारा परिवाद समिति का रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया. साथ ही इनके द्वारा बताया गया कि इस परिवाद समिति की बैठक में उनकी उपस्थिति अनिवार्य नहीं थी. इस रिपोर्ट में क्या है वह उससे अनभिज्ञ है रिपोर्ट का अवलोकन किया गया, जिसमें आवेदिका के पति घटना दिनांक को उपस्थित थे. आवेदिका के खिलाफ पर झूठी शिकायत पर कार्रवाई किए जाने का उल्लेख है, लेकिन परिवाद समिति ने उक्त आपत्ति का कोई उल्लेख नहीं किया. लेखापाल को समझाइश देकर छोड़ दिया और आवेदिका के पति का अन्यत्र स्थान पर पदस्थापना करने की अनुशंसा कर दिया.

प्रारम्भिक तौर पर परिवाद समिति की कार्रवाई में यह गम्भीर अनियमितता परिलक्षित होता है. परिवाद समिति के यह रिपोर्ट कलेक्टर बलौदाबाजार को प्रेषित किया है. आयोग की ओर से विस्तृत पत्र और इस प्रकरण की दस्तावेज की प्रति कलेक्टर बलौदाबाजार को भेजा जाएगा. इस पूरी परिवाद समिति की जांच को निरस्त किए जाने की अनुशंसा भी किया गया. लैंगिक उत्पीड़न कानून 2013 के स्पष्ट 5 बिंदुओं में से किसी भी एक बिंदु का उल्लेख इस रिपोर्ट में नहीं है. आवेदिका के पति के द्वारा ली गई आपत्ति का निराकरण भी नहीं किया गया है. परिवाद समिति का रिपोर्ट पूर्णतः दूषित और अविधित प्रतीत होती है. आवेदिका चाहे तो इस बिंदु को कलेक्टर बलौदाबाजार के समक्ष भी रख सकती है. इस निर्देश के साथ प्रकरण को निराकृत कर दिया गया.

 

 

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