औरंगाबाद। बिहार में लोक आस्था का महापर्व चैती छठ पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मंगलवार को पर्व के तीसरे दिन व्रतियों ने डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर सुख-समृद्धि की कामना की। पटना के गंगा घाटों से लेकर औरंगाबाद के सूर्य मंदिर तक, हर ओर केवल श्रद्धा और भक्ति का नजारा दिखाई दिया।
7 लाख श्रद्धालुओं की भीड़
छठ के महापर्व पर औरंगाबाद के देव स्थित सूर्यकुंड और रुद्र कुंड तालाब में जनसैलाब उमड़ पड़ा। अनुमान के मुताबिक, यहां लगभग 7 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य अर्पित किया। श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे।
पटना और मुजफ्फरपुर में उमड़ी भीड़
राजधानी पटना के दीघा घाट पर शाम 4 बजे से ही व्रतियों का आना शुरू हो गया था। साढ़े 4 बजते-बजते पूरा घाट आस्था के रंग में सराबोर हो गया। वहीं, मुजफ्फरपुर के सिकंदरपुर स्थित सीढ़ी घाट और आश्रम घाट पर भी हजारों व्रतियों ने डूबते सूर्य को नमन किया।
दंडवत प्रणाम और आस्था का कठिन संकल्प
समस्तीपुर में बूढी गंडक नदी के विभिन्न घाटों (मारवाड़ी और मगर दही घाट) पर एक अलग ही दृश्य देखने को मिला। यहां कई व्रती अपने घर से घाट तक दंडवत प्रणाम करते हुए पहुंचे। पूर्णिया के पक्की तालाब और सौरा नदी घाट पर भी श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह दिखा। पूजा-अर्चना के साथ-साथ लोग इस यादगार पल को सेल्फी में भी कैद करते नजर आए।
सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम
भीड़ को नियंत्रित करने और व्रतियों की सहायता के लिए सभी जिलों में विशेष व्यवस्था की गई थी। घाटों पर बैरिकेडिंग, गोताखोरों की तैनाती और रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था रही, ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो।
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