Chaiti Chhath 2026: चैती छठ पूजा का आज मंगलवार (24 मार्च) को तीसरा दिन है। आज के दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। आज के दिन नदी किनारे बने हुए छठ घाट पर शाम के समय व्रती महिलाएं पूरी निष्ठा भाव से भगवान भास्कर की उपासना करती हैं। व्रती पानी में खड़े होकर ठेकुआ, गन्ना समेत अन्य प्रसाद सामग्री से सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं और अपने परिवार, संतान की सुख समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।

ढलते सूर्य को अर्घ्य देने का समय

इस साल चैती छठ पर संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026 को दी जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन सूर्यास्त का समय शाम 6 बजकर 40 मिनट है, इसलिए इसी समय डूबते सूर्य को अर्घ्य देना शुभ रहेगा। छठ पूजा में सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य देने की परंपरा है, जिसे बहुत पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में ऊर्जा, सकारात्मकता और सफलता आती है।

चैती छठ 2026 का क्रार्यक्रम

22 मार्च को नहाय-खाय।
23 मार्च को खरना पूजा।
24 मार्च को डूबते सूर्य की उपसना व अर्घ्य।
25 मार्च की सुबह का उगते सूर्य को अर्घ्य और पारण।

महापर्व के लिए प्रशासन तैयार

राजधानी पटना समते अन्य जगहों पर छठ को लेकर लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। प्रशासन द्वारा गंगा नदी किनारे कई घाटों का निर्माण कराया गया है। इसके अलावा नगर निगम द्वारा कई जगहों पर कृत्रिम तालाब भी बनाए गए हैं। छठ पूजा के तीसरे दिन आज गंगा किनारे लाखों की संख्या में छठव्रती और श्रद्धालु संध्या के समय सूर्य को अर्घ्य देंगे, जिसे लेकर सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

क्यों मनाई जाती है छठ पूजा?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, छठ पूजा का पर्व सूर्य देव को धन्यवाद देने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के लिए मनाया जाता है। भक्त इस दौरान सूर्य देव की बहन छठी मईया की भी पूजा करते हैं, जो संतान और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना के लिए की जाती है। ऐसा माना जाता है कि छठ पूजा करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं और पारिवारिक जीवन में सुख-शांति का वास होता है।

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