Chaitra Navratri 2026 : चैत्र नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ अत्यंत फल दायी माना जाता है, लेकिन आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के लिए इसका संपूर्ण पाठ करना संभव नहीं हो पाता. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि शास्त्रों में इसके सरल विकल्प भी बताए गए हैं. जिनसे समान फल की प्राप्ति संभव मानी गई है.

लेकिन उससे पहले यह भी जान ले की दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ करने से क्या फायदा या फल मिलता है. नवरात्रि के इन नौ दिनों में दुर्गा सप्तशती का पाठ विशेष रूप से फल दायी माना जाता है. यह पवित्र ग्रंथ मां दुर्गा की शक्ति, करुणा और दैवीय लीलाओं का वर्णन करता है तथा इसमें 13 अध्यायों के माध्यम से देवी की महिषासुर पर विजय की गाथा बताई गई है. मान्यता है कि दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से जीवन के कष्ट, भय और बाधाएं दूर होती हैं. साधक को मां दुर्गा की विशेष कृपा प्राप्त होती है. यही कारण है कि नवरात्रि में नवचंडी, शतचंडी और सहस्त्र चंडी जैसे यज्ञों का आयोजन भी किया जाता है.
कम समय में भी मिलेगा समान फल
यदि आपके पास समय की कमी है, तो आप पूरे पाठ के बजाय केवल रात्रि सूक्त (पहला अध्याय) और देवी सूक्त (पांचवां अध्याय) का पाठ कर सकते हैं. इसे भी अत्यंत प्रभावशाली माना गया है और इससे माता की कृपा प्राप्त होती है.
मंत्र जप से मिलेगा पूरा लाभ
अगर यह भी संभव न हो, तो सबसे सरल और शक्तिशाली उपाय है. इस बीज मंत्र का 108 या 1008 बार जप करने से सप्तशती पाठ के समान फल प्राप्त होने की मान्यता है.
- ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे
इसके अलावा
- या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता…
का नियमित जप भी जीवन से भय और बाधाओं को दूर करता है और यदि आप और भी सरल उपाय चाहते हैं, तो जय माता दी या दुर्गा दुर्गा का भावपूर्वक स्मरण भी उतना ही फलदायी माना गया है.
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