अंकित तिवारी, रायसेन (बरेली)। Chaitra Navratri 2026: प्राचीन शक्तिपीठ मां हिंगलाज मंदिर बलूचिस्तान के अलावा मध्यप्रदेश के रायसेन के तहसील बाड़ी में भी स्थित है। यह भोपाल से महज 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह भारत देश का एकमात्र हिंगलाज माता मंदिर है। जिसकी महिमा भोपाल रियासत की पहली महिला शासक बेगम कुदसिया ने भी देखी है।

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बलूचिस्तान के मां हिंगलाज मंदिर में गिरा था माता सती शीश

बलूचिस्तान(Balochistan), पाकिस्तान का वह क्षेत्र जहां आजादी की मांग और अशांति का माहौल है। मां हिंगलाज का यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का शीश गिरा था। भारत समेत दुनिया भर के लोगों की अटूट आस्था इस मंदिर से जुड़ी हुई है। मध्यप्रदेश में हिंगलाज माता की उपशक्तिपीठ है, जो 500 साल पुरानी है।

बलूचिस्तान से लाई गई थी मंदिर की दो अखंड ज्योतियां

इस मंदिर की दो अखंड ज्योतियां बलूचिस्तान के हिंगलाज मंदिर से लाई गई थीं। खाकी अखाड़ा के महंत भगवानदास महाराज ने 16वीं सदी में दो साल की कठिन पदयात्रा कर यह ज्योति लाई थी। ‘पण्डावही के अनुसार, वे संग्रहणी रोग से पीड़ित थे, फिर भी मां के दर्शन की लालसा में कंदमूल खाकर यात्रा पूरी की। हिंगलाज माता की महिमा भोपाल रियासत की पहली महिला शासक बेगम कुदसिया ने भी देखी है। 

बेगम ने प्रसाद के नाम पर भेजा था मांस का थाल, चमत्कार से मिठाई में बदला

बता दें कि, 1820-25 में बेगम ने मंदिर की आरती की आवाज पर नाराज होकर शोर बंद करने का आदेश दिया था, लेकिन मंदिर के महंत ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। बेगम ने परीक्षा लेने के लिए प्रसाद के नाम पर मांस का थाल भेजा, लेकिन मां के चमत्कार से वह मिठाई में बदल गया। आश्चर्यचकित बेगम ने माफी मांगी और मंदिर को जागीर दान में दे दी।

बच्चे पढ़ते हैं वेद पाठ

वर्तमान में मंदिर की संचालन व्यवस्था देख रहे पंडित द्वारका प्रसाद त्रिपाठी बताते हैं कि ट्रस्ट समिति मंदिर का संचालन कर रहा है। यहां पाठशाला भी है जिसमें कई बच्चे वेद पाठ व कर्मकांड का अध्ययन करते हैं। यहां 65 एकड़ का बगीचा भी है। 

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हिंगलाज माता की महिमा दोनों देशों में अटूट

बलूचिस्तान में अशांति के बावजूद हिंगलाज माता की महिमा दोनों देशों में अटूट है। यह मंदिर न केवल आस्था, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी प्रतीक है, जो बलोच और हिंदू समुदायों को जोड़ता है। नवरात्रि में यहां दर्शन के लिए देशभर से श्रद्धालु हजारों की संख्या में पहुंचते हैं। 

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