चैंबर चुनाव में फंसा जाति का पेंच, एकता पैनल उम्मीदवार को लेकर उलझी

रायपुर. छत्तीसगढ़ चैंबर्स ऑफ कॉमर्स के चुनाव इस बार जातिगत समीकरणों के पेंच में फंसता दिख रहा है. पिछले तीस साल से चैंबर पर काबिज़ व्यापारी एकता पैनल इस जातीय समीकरण को सेट करने में अपने अध्यक्ष और महामंत्री के उम्मीदवार नहीं घोषित कर पा रहा है. दूसरी ओर तीन सालों से सेंधमारी की कोशिशों में जुटा व्यापारी विकास पैनल इस बार तगड़ा मुकाबला पेश कर रहा है. चुनाव 18 दिसंबर को है और नतीजे 19 दिसंबर को घोषित किए जाएंगे.

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एकता पैनल की सबसे बड़ी दिक्कत है कि किसे अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाए. इस पद के लिए 11 उम्मीदवारों ने दावेदारी की थी. पंच कमेटी ने तीन नाम फाइनल किए हैं. पहला नाम मौजूदा अध्यक्ष अमर परवानी का है. दूसरा नाम जितेंद्र बरलोटा का है और तीसरा नाम मंत्री बृजमोहन अग्रवाल के भाई योगेश अग्रवाल का है. इन तीनों में से एक नाम तय करने में भारी मुश्किलें आ रही हैं.

दरअसल, इन सारी दिक्कतों की वजह है चैंबर के सदस्यों की संख्या में भारी इजाफे के साथ जातीय समीकरणों में आमूलचूल परिवर्तन. अब तक चैंबर में सबसे ज़्यादा सदस्य सिंधियों का था लेकिन इस बार विकास पैनल ने 2 हजार नए सदस्य जोड़ कर इस समीकरण को बिगाड़ दिया है.

इस वक्त करीब 3300 सदस्य सिंधी हैं. जबकि 2800 सदस्य अग्रवाल जाति से ताल्लुक रखते हैं. करीब 2040 वोट जैनियों के हैं. इसी तरह माहेश्वरी 550, पंजाबी 1024 और मुसलमान 389 हैं. हालात ऐसे बन गए हैं कि अब चुनाव में सिर्फ सिंधी वोट के बलबूते विजय नहीं हासिल की जा सकती है. जीत के लिए अग्रवाल और जैनी वोटों को भी साधना होगा.

एकता पैनल की दिक्कत है कि विकास पैनल के यूएन अग्रवाल अध्यक्ष पद के लिए तैयार बैठे हैं. वो महामंत्री पद पर किसी सिंधी या जैनी को खड़ा करके दो जातियों के वोट से बाज़ी मार सकते हैं. विकास पैनल की इसी बात के मद्देनज़र फंसा हुआ है कि आखिर वो किसे बनाए अपना उम्मीदवार.

सूत्र बताते हैं कि इस लिहाज़ से जितेंद्र बरलोटा की दावेदारी मज़बूत है. बरलोटा जैन समुदाय से आते हैं और चैंबर की राजनीति में बेदह सक्रिय हैं. एकता पैनल उन्हें अध्यक्ष की टिकट देकर महासचिव पद पर किसी सिंधी या अग्रवाल समुदाय के उम्मीदवार को खड़ा कर सकती है. इस समीकरण में पैनल की कोशिश सिंधी वोटरों के साथ एक और बड़े वोटबैंक को साधने की होगी.

अगर एकता पैनल योगेश अग्रवाल को उतारती है तो जैन समुदाय का वोटबैंक उससे नाराज़ हो सकता है.इसके अलावा विकास पैनल से भी यूएन अग्रवाल जातिगत वोट काटेंगे. अमर परवानी को लड़ाने की सूरत में भी जैन और अग्रवाल वोटबैंक को साधना मुश्किल हो जाएगा. कुल मिलाकर तरह-तरह के कयासों का दौर जारी है. उम्मीद है कि इस हफ्ते एकता पैनल अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर देगी.

 

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